‘न मुम्बई पुलिस कमिश्नर और न ही महाराष्ट्र DGP ने फोन उठाया..’ ये कहना है बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का। गुप्तेश्वर पांडेय ने एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए कई सारे खुलासे किये हैं। ‘Republic Bharat’ से बातचीत के दौरान हैरानी जताते हुए बिहार के डीजीपी ने कहा कि ’34 साल का एक नौजवान लड़का उसके पास नाम था, दौलत थी, शोहरत थी सबकुछ था…वो एक दिन फांसी पर लटक जाता है? 14 तारीख को यह घटना होती है और 20 तारीख तक वहां सबकुछ शांत हो जाता है…20 तारीख के बाद वहां कोई हलचल नहीं होती…उनके हताश पिता अंत में पटना में थाने में आकर एफआईआर दर्ज कराते हैं।’
डीजीपी ने कहा कि ‘जिस दिन यह घटना हुई थी अगले दिन मैंने कमिश्नर ऑफ मुंबई पुलिस को फोन किया था, उन्होंने फोन नहीं उठाया…मैंने उन्हें मैसेज किया था लेकिन आज तक उन्होंने रिस्पॉन्स नहीं किया। मैंने मुंबई पुलिस के कमिश्नर परम बीर सिंह को मैसेज कर कहा कि मैं बिहार का डीजीपी बोल रहा हूं और मैं सुशांत सिंह की मौत के मामले में कुछ जानना चाहता हूं लेकिन आज तक उन्होंने मेरे मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया…तो हमको उसी दिन से शक हो गया था।’ उन्होंने परम बीर सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि वो मेरी बातों का खंडन करें।
गुप्तेश्वर पांडे ने आगे कहा कि ‘आज मैंने महाराष्ट्र के डीजीपी को कई बार फोन लगाया लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया…मैंने उन्हें मैसेज कर अपने बारे में बताया लेकिन इन्होंने भी कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। डीजीपी ने आगे बताया कि जब मेरे मैसेज और फोन का कोई जवाब नहीं मिला तब मैंने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम से बातचीत कर कहा कि वो महाराष्ट्र के चीफ सेक्रेटरी होम से बात करें। लेकिन महाराष्ट्र के चीफ सेक्रेटरी ने उनके भी फोन का कोई जवाब नहीं दिया।
डीजीपी ने कहा कि ‘हमें एफएसएल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा अन्य रिपोर्ट भी नहीं दिये गये हैं। हमारे पास पोस्टमार्टम और घटनास्थल की वीडियोग्राफी नहीं है…हमें किसी तरह की सूचना नहीं दी जा रही है..’
.महाराष्ट्र पुलिस का कोई अधिकारी हमसे मिलने तक को तैयार नहीं है। हमे सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराया गया है। एफआईआर छोड़ कर हमें मुंबई पुलिस की तरफ से कुछ भी नहीं दिया गया है।’
