महाराष्ट्र के नांदेड़ में माधव गिट्टे का जन्म हुआ था। घर में माता-पिता के अलावा कुल पांच भाई-बहन थे। माता-पिता अशिक्षित थे। परिजनों के पास थोड़ी सी जमीन थी जिसपर वो खेती किया करते थे और इसी खेती पर निर्भर था पूरे परिवार का पालन-पोषण। परिवार की आर्थिक कमजोरी को दूर करने के लिए माधव गिट्टे कभी अपने खेतों में काम करते थे तो कभी दूसरों के। उन दिनों दूसरे के खेतों में काम करने पर उन्हें मजदूरी करने के लिए दिन के 40-60 रुपए तक मिल जाया करते थे।
गरीबी से जूझ रहे परिवार पर मुसीबत उस वक्त आई जब माधव गिट्टे की मां को कैंसर हो गया। माधव गिट्टे जब ग्यारहवीं कक्षा में थें तब उनकी मां का निधन हो गया। मां के देहांत के बाद पूरी तरह खेतों में काम करने उतरना पड़ा और बारहवीं का फॉर्म उन्होंने कुछ समय बाद भरा। एक सरकारी स्कूल में कम पैसों में एडमिशन हो गया। एक साक्षात्कार में माधव गिट्टे ने बताया था कि वो हर रोज 11 किलोमीटर तक साइकिल चला कर पढ़ने जाया करते थे। हर रोज आने-जाने में 22 किलोमीटर साइकिल चलाने की वजह से वो थक जाया करते थे और सो जाया करते थे। नतीजा यह हुआ कि बारहवीं की परीक्षा में उन्हें महज 56 प्रतिशत अंक ही हासिल हुए।
इसके बाद माधव गिट्टे ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ग्रेजुएशन करने की बजाए कहीं नौकरी करने के बारे में सोची। हालांकि, उसी वक्त एक कॉलेज में डिप्लोमा कोर्स लॉन्च हुआ जिसकी फीस काफी कम थी। गांव वालों से किसी तरह पैसे लेकर किसी तरह माधव ने अपनी फीस जमा की और अच्छे अंकों से डिप्लोमा पास भी कर लिया। डिप्लोमा के बाद माधव को पुणे की एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला मिल गया। लेकिन इस कॉलेज की फीस भरने के लिए माधव के घरवालों ने खेत और मकान भी गिरवी रख दिया था।
जैसे-तैसे माधव की इंजीनियरिंग पूरी हुई और उन्हें एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिली। इस दौरान एक बार उन्हें पैसे की बहुत दिक्कत आयी और उन्होंने एजुकेशन लोन लेने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए। सिस्टम की यह बात उन्हें उस वक्त बहुत चुभी थी। अपने दोस्तों के बल पर माधव ने दिल्ली जाकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की थी।
पढ़ाई के लिए समय नहीं निकाल पाने की वजह से उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी थी। साल 2017 में उनका प्री भी क्लियर नहीं हुआ। अगले साल 2018 में वे इंडियन ऑडिट और एकाउंट्स सर्विस के लिए सेलेक्ट हुए पर उनका सपना आईएएस बनने का था। आखिरकार साल 2019 की सफलता ने उन्हें 2020 बैच का आईएएस पद दिलाया।

