Kanpur Lab Technician Sanjit Murder Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर में लैब तकनीशियन संजीत यादव मर्डर केस में बवाल मचने पर राज्य की योगी सरकार ने पुलिस वालों पर बड़ी कार्रवाई की है। एडिशनल सुपरिटेन्डेंट ऑफ पुलिस अपर्णा गुप्ता, सीओ मनोज मनोज गुप्ता, बर्रा पुलिस थाने के पूर्व इंचार्ज रंजीत राय और चौकी इंचार्ज राजेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि परिवार वालों के गुस्से के शांत करने के लिए तमाम सरकारी प्रयासों के बीच मृतक संजीत यादव की बहन रूचि ने पुलिस वालों पर बड़ा आऱोप लगाये है।

पीड़ित परिवार यह कह रहा है कि पुलिस के कहने पर उन्होंने संजीत के किडनैपर्स को 30 लाख रुपए दिए थे। लेकिन पुलिस ने शुक्रवार को यह साफ किया है कि इस मामले में पकड़े गए 7 आरोपियों ने फिरौती लेने की बात से इनकार किया है। ‘आज तक’ से बातचीत के दौरान संजीत यादव की बहन रुचि ने फिरौती न देने के सवाल पर कहा कि ‘अगर मेरे पापा ने पैसे फेंके तो पैसे गए कहां? किडनैपर के पास नहीं गया तो पुलिस प्रशासन और बर्रा थाना इंचार्ज रणजीत राय पैसा खाए होंगे।’

रुचि ने आरोप लगाया है कि शुरू से ही इस मामले में पुलिस टाल-मटोल का रवैया अपना रही है। रूचि के मुताबिक पुलिस ने शुरू में गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। पुलिस किडनैपिंग का मामला पुलिस दर्ज ही नहीं करना चाहती थी। उनका यह भी कहना है कि पुलिस इस सारे गेम के लिए उन्हें (रूचि) को ही जिम्मेदार ठहराने में लगी थी। बाद में जब अपहरणकर्ताओं के फोन आए औऱ पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस की तरफ से कह दिया गया कि ‘गलती हो गई।’

रुचि ने हा है कि ‘मेरे पास कॉल रिकॉर्डिंग है। जिस समय पैसा दिया गया था उस समय की कॉल रिकॉर्डिंग है। पुलिस को यह देखना चाहिए था कि कौन पैसा ले गया कहां ले गया लेकिन पुलिस खुद रफ्फू-चक्कर हो गई और पैसों का बंदरबांट करने लगी। मेरे पापा आधा घंटे हाईवे पर बैठे रहे’

आपको बता दें कि 23 जून को संजीत का अपहरण किया गया था। पुलिस ने बताया है कि अपहरण के 4 दिन बाद ही संजीत की हत्या कर दी गई थी। पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस ने फिरौती की रकम किडनैपर्स को दिलवा दी लेकिन गुरुवार को अचानक संजीत की मौत की खबर सामने आ गई। करीब एक महीने तक परिवार पूरी तरह अंधेरे में रहा। हालांकि संजीत यादव की लाश अब तक नहीं मिली है।