देश में साहसी पुलिस अफसरों की कोई कमी नहीं है। आज बात एक ऐसे आईपीएस अधिकारी कि जिनका नाम सुनते ही अपराधी माथे पर आया पसीना पोंछना भी भूल जाते हैं। 25 से ज्यादा एनकाउंटर कर चुके आईपीएस अधिकारी विजय भूषण साल 1986 में उत्तर प्रदेश पुलिस में PPS रैंक पर भर्ती हुए। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के रहने वाले विजय भूषण बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बनारस और लखनऊ जैसे जिलों में पोस्टेड रहे और यहां उन्होंने बड़े-बड़े अपराधियों को नाको चने चबाने पर मजबूर कर दिया था।

जनता के दिल में जगह बनाने वाले विजय भूषण सीएम योगी आदित्यनाथ की सिक्योरिटी के भी डीआईजी रह चुके हैं। जिसके बाद उनको डीआईजी आजमगढ़ का चार्ज दिया गया था और बाद में कानून व्यस्था के मद्देनजर उनको डीआईजी कानून व्यस्था बनाया गया था। विजय भूषण को अपने कार्यकाल के दौरान कई सारे अवार्ड मिले। काम करने की उनकी विशेष शैली इतनी मशहूर हुई कि कई बार उन्हें विदेश दौरे पर भेजा गया। फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया तक देश का पचरम लहराने वाले आईपीएस अफसरों में विजय भूषण की गिनती की जाती है।

बैंक डकैतों को मारा

प्रमोशन पाकर 2002 बैच के आईपीएस अफसर बने विजय भूषण एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से भी मशहूर हैं। बताया जाता है कि गाजियाबाद में तैनाती के दौरान बैंक डकैती के समय उन्होंने मौके पर ही डकैतों को मार गिराया था। इस कारनामे की वजह से वो काफी चर्चा में रहे थे। बात साल 2010 की है जब विजय भूषण बनारस में पुलिस अधीक्षक (नगर) के पद पर तैनात थे। यहां उन्होंने डेढ़ लाख के इनामी बदमाश किट्टू का एनकाउंटर किया था। बताया जाता है कि रोशन गुप्ता उर्फ किट्टू उर्फ बाबू गिरोह बनारस के साथ ही चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ जिले में उस वक्त काफी सक्रिय था। इसके अलावा उन्होंने 50000 रुपए के इनामी बदमाश विनोद का भी एनकाउंटर किया था। करीब ढाई साल तक बनारस में रहने के दौरान आईपीएस विजय भूषण ने यहां बड़े-बड़े कांडों का उद्भेदन किया था।

गोली लगने से हुए थे घायल

एक बार पुलिस मुठभेड़ के दौरान विजय भूषण बाल-बाल बचे थे। दरअसल बदमाशों से हो रही मुठभेड़ के दौरान विजय भूषण को आंख के पास गोली लगी थी जिसका इलाज काफी दिनों तक चला। लेकिन विजय भूषण ने इलाज के दौरान भी कभी भी खुद को काम से अलग नहीं किया। घायल होते हुए भी वे हमेशा जनता की सेवा के लिए तैयार रहे।

आईपीएस अफसर विजय भूषण ने अपनी शिक्षा दिल्ली के साथ-साथ कई जगहों से ली है। आईपीएस अफसर विजय भूषण को जहां किताबें पढ़ने का काफी शौक है तो वहीं अपराध से जुड़ी हुई फिल्में भी वे चाव से देखते हैं।