अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने साल 2011 में पुलिस सेवा ज्वायन किया। अन्नामलाई कुप्पुस्वामी की पहली पोस्टिंग कर्नाटक के कारकला में हुई थी। इस जगह पर वो सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। अपनी सेवा के दौरान अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने ड्रग्स, तंबाकू और अवैध शराब के खिलाफ कैंपेन चलाया। उन्होंने लोगों को ड्रग्स और तंबाकू से होने वाले नुकसान को लेकर काफी जागरुक किया। इसके अलावा उन्होंने कई अवैध शराब की दुकानें बंद करा दी।
साल 2015 और अगस्त 2016 के बीच वो उडुप्पी जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहे। यहां पर ड्यूटी के दौरान उन्होंने पहली बार मर्डर केस की छानबीन की। 17 साल की छात्रा की हत्या से पहले उसके साथ दुष्कर्म भी किया गया था। एक वेबसाइट से बातचीत करते हुए अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने कहा था कि नाबालिग लड़की की मां ने उनकी आंख में आंख डालकर कहा था कि ‘क्या वो उनकी बेटी को वापस ला सकते हैं? महिला की यह बात सुन अन्नामलाई दंग रह गए थे।
अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने पीड़िता की मां को भरोसा दिलाया था कि वो ना सिर्फ दोषियों को सजा दिलाएंगे बल्कि उनकी बेटी की यादों को भी जिंदा रखेंगे। इस तेज-तर्रार आईपीएस ने इस मामले में आरोपी 19 साल के 2 लड़कों को 2 दिनों में गिरफ्तार कर लिया था। इतना ही नहीं अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने पीड़िता के नाम पर 10,000 रुपए का स्कॉलरशिप भी शुरू किया था। मैट्रिक की परीक्षा में टॉप करने वाली छात्रा को यह छात्रवृति दी जाती है।
उडुप्पी में भी तैनाती के दौरान एक दिन अन्नामलाई कुप्पुस्वामी एक दुकान पर गए और जाकर उन्होंने दुकानदार से सिगरेट, गुटखा और बिड़ी मांगा था। जैसे ही दुकानदार ने उन्हें यह सामान दिया उसी वक्त अन्नामलाई ने उस दुकानदार पर 30,000 रुपए का जुर्मान ठोक दिया क्योंकि वो अवैध तरीके से इन सामानों की बिक्री कर रहा था।
उन्होंने आठ साल के करियर में अपनी पुलिसिंग स्टाइल के कारण ‘सिंघम अन्ना’ के तौर पर पहचान बनाई है। आपको बता दें कि खूंखार आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के सदस्य यासीन भटकल का घर भी उडुप्पी में था। ऐसा कहा जाता है कि इस्लामी कट्टरपंथ और इंडियन मुजाहिदीन संगठन की जड़े उडुप्पी में जमी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान अन्नामलाई को इस्लाम में गहरी दिलचस्पी हुई। दरअसल अन्नामलाई ने आतंकवाद से लड़ने के लिए इस्लाम को पढ़ा। उन्होंने यह समझने के लिए इस धर्म के अध्ययन का फैसला किया कि ‘कैसे धार्मिक ग्रंथों की गलत व्याख्या के कारण कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है।
अन्नामलाई ने एक साक्षात्कार में खुद कहा था कि ‘मैंने मजहबी उलेमा की मदद से कुरान और हदीस का अध्ययन किया…मैंने दर्शन को समझने की कोशिश की…इसने मुझे इंडियन मुजाहिदीन, सिमी और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों का मानस समझने में मदद की, जिसने भटकल-कुंडापुरा क्षेत्र के चारों ओर अपना नेटवर्क फैला रखा है।’
साल 2017 में हुए सांप्रदायिक दंगे को शांत कराने में अन्नामलाई कुप्पुस्वामी की भूमिका की सभी ने सराहना की थी। अन्नामलाई कुप्पुस्वामी ने कई बैठकें आयोजित कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की थी। साल 2019 में जब वह उस समय पुलिस उपायुक्त, बेंगलुरु दक्षिण के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जब उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया था।
आईआईएम-लखनऊ से एमबीए के साथ-साथ एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अन्नामलाई किसी समय उद्यमी बनने के बारे सोचते थे, लेकिन ‘लोगों से जुड़े रहने के लिए’ सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने की खातिर उन्होंने इस सपने को दरकिनार कर दिया और लोगों से जुड़ने का काम उन्होंने किया भी। अन्नामलाई कुप्पास्वामी मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले थे।

