कंचन चौधरी भट्टाचार्य। यह वो नाम है जिनके खाते में बेहतरीन उपबल्धियों की कोई कमी नहीं है। सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह है कि वो देश की पहली महिला डीजीपी बनीं थीं। आज हम जिस आईपीएस अफसर की यहां बात कर रहे हैं उन्होंने ना सिर्फ अपराधियों के मन में पुलिस के लिए खौफ पैदा किया बल्कि पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने कई सराहनीय काम भी किये। कंचन चौधरी मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के एक निम्नमध्यवर्गीय परिवार से थी। अमृतसर से अधिकांश पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए किया।
कहा जाता है कि 3 फरवरी, 1967 को कंचन चौधरी भट्टाचार्य के पिता मदन मोहन चौधरी पर जुल्म ढाए गए थे। इल्जाम पुलिस पर लगा था। पिता पर जुल्म ढ़ाहने की तस्वीरें उनकी दो बेटियों से करीब से देखी थीं और प्रण लिया था कि वो अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा जरुर करेंगी। मदन मोहन की छोटी बेटी कविता चौधरी ने पिता पर हुए जुल्म को ′उड़ान′ सीरियल के माध्यम से पूरे देश को दिखाया तो वहीं बड़ी बेटी कंचन चौधरी बन गईं आईपीएस अफसर।
कंचन और कविता दोनों अमृतसर स्कूल सेक्रेड-हार्ट से पढ़ी हैं। इसके बाद कंचन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आईपी कॉलेज से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 1973 में पहली बार आईपीएस की परीक्षा दी और देश की दूसरी महिला आईपीएस बनीं। वह उत्तरप्रदेश में पहली महिला आईपीएस, पहली महिला डीआईजी और पहली महिला आईजी थीं। अंडर ट्रेनिंग एएसपी कंचन लखनऊ व मलिहाबाद में कार्यरत रहीं।
बताया जाता है कि अपनी दिलेरी और बहादुरी के लिए हमेशा चर्चा में रहने वाली कंचन चौधरी ने 13 खूंखार डकैतों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। अपने करीब 33 साल के करियर में उन्होंने बैडमिंटन खिलाड़ी सईद मोदी और रिलायंस-बांबे डाइंग जैसे कई संवेदनशील केस हैंडल किए।
1975 से 1978 तक कंचन चौधरी भट्टाचार्य लखनऊ की एसपी व एसएसपी भी रहीं। बरेली में डीआईजी रही और सीबीआई में बड़े पदों पर काम किया। 15 जून, 2004 को कंचन ने उत्तराखंड की पहली महिला डीजीपी बन एक नया इतिहास लिखा था। 26 जून, 2004 को बतौर डीजीपी पहली समीक्षा बैठक में उन्होंने दो टूक कहा था ‘सुधर जाओ या घर जाओ’…इसके बाद तो वहां रातों-रात वहां की पुलिस का रवैया पब्लिक के लिए दोस्ताना बन गया था।
साल 2004 में मेक्सिको में हुई इंटरपोल की बैठक में उन्होंने भाग लिया था. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान का भी दौरा किया था। साल 1997 में उन्हें प्रेसिडेंट मेडल से सम्मानित किया गया था। पहले यूपी और बाद में उत्तराखंड कैडर लेने से पहले कंचन चौधरी मुंबई में सीआईएसएफ में कार्यरत थीं। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी कुछ समय काम किया।
साल 1989 से 1991 तक दिल्ली दूरदर्शन पर ′उड़ान′ सीरियल में उनकी बहन कविता चौधरी ने खुद कल्याणी की ऐसी दमदार भूमिका निभाई कि पूरा देश उन्हें कल्याणी सिंह के नाम से जानने लगा। कविता ने इस सीरियल को खुद लिखा और डायरेक्ट किया था।
पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद कंचन चौधरी ने राजनीति में भी कदम रखा था। साल 2019 में 26 अगस्त को कंचन चौधरी का 72 साल की उम्र में निधन हो गया था। वो बीमार थीं औऱ अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
