आज बात एक ऐसे IAS अफसर की जिसने कभी उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम को प्रसारित किये जाने से रोका था। आईएएस जयदेव सारंगी और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बीच जब टकराव की स्थिति बनी थी तब यह खबर मीडिया में काफी छाई रही थी। ओडिशा के आदिवासी बहुल इलाके से आने वाले जयदेव सारंगी ने एक बार दावा किया था जब वो साल 2004-05 में दिल्ली में सहकारिता सोसाइटी के अतिरिक्त रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे तब उस दौरान उन्होंने चार हजार करोड़ रुपए के भूमि घोटाले को उजागर किया था। सारंगी ने कहा था कि इसके बाद बिल्डरों ने उन्हें हटाने की मांग शुरू कर दी थी।

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सेवा काल के दौरान साल 2012 में जयदेव सारंगी एक बार उस वक्त चर्चा में आए थे जब वो गोवा में आबकारी आयुक्त के पद पर तैनात थे। उन्होंने एक ही दिन में कई आबकारी अधिकारियों का तबादला कर दिया था। उनके इस कदम ने राज्य में शराब माफिया को भी परेशान किया था। जयदेव सारंगी उप महानिरीक्षक, पुलिस अधीक्षक (तिहाड़), महानिरीक्षक (तिहाड़), परिवहन आयुक्त (अंडमान निकोबार) एवं पंचायती राज (अंडमान निकोबार) के प्रभारी रह चुके हैं।

साल 2017 में यह अधिकारी उस वक्त भी काफी सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के एक फेसबुक लाइव के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। दरअसल उस वक्त डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया जीएसटी के मुद्दे पर फेसबुक लाइन करना चाहते थे। लेकिन जयदेव सारंगी ने उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम का फेसबुक पर सीधा प्रसारण करने की अनुमति नहीं दी थी।

इतना ही नहीं ‘भाषा’ ने अपनी एक खबर में बताया था कि प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ने आम आदमी पार्टी (आप) को नोटिस भेजकर 97 करोड़ रुपया जमा करने का निर्देश दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश का उल्लंघन करते हुए विज्ञापन पर खर्च किया गया था। बताया जाता है कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से मतभेद के बाद डिप्टी सीएम ने तत्कालीन मुख्य सचिव एम.एम. कुट्टी को सारंगी को हटाने का निर्दश भी दिया था।