गुजरात के रिटायर IAS अधिकारी एस के लंगा पर एफआईआर दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि आईएएस रहते हुए वे पब्लिक सर्वेंट के रूप में आपराधिक कदाचार में लिप्त रहे। इतना ही नहीं उन्होंने सरकारी खजाने को नुकसान भी पहुंचाया। इस बात की जानकारी पुलिस ने दी।

असल में गांधीनगर कलेक्टर के पद से रिटायर हुए एस के लंगा के खिलाफ जिला कलेक्ट्रेट के एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर बुधवार रात गांधीनगर के सेक्टर-7 पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है।

एफआईआर में कहा गया है कि लंगा जब आईएएस थे तो रिश्वत लिया था। उन्होंने भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत रिश्वत लेकर अपराध किया है। एक पब्लिक सर्वेंट के रूप में उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया है। उन्होंने पद की गरिमा को बनाए नहीं रखा और विश्वास को तोड़ा। एक पब्लिक सर्वेंट होते हुए भी वे अवैध रूप से व्यापार, लेन-देन में शामिल हुए।

कलेक्टर रहते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त रहे

एफआईआर में की गई शिकायत के अनुसार, गांधीनगर जिले के तत्कालीन कलेक्टर के रूप में लंगा ने अपने साथी अधिकारियों के साथ प्लानिंग की और लोगों और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। अधिकारी ने कहा कि लंगा ने अवैध तरीके से जमीन के हिस्से को गैर-कृषि भूमि उपयोग की अनुमति दी और सरकार को देय प्रीमियम का भुगतान नहीं किया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। अधिकारी ने कहा कि यह आदेश 6 अप्रैल 2018 को दिया गया था तब लंगा गांधी नगर में कलेक्टर थे।

आय से अधिक संपत्ति का निर्माण

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि लंगा ने भ्रष्ट तरीके से अपने साथियों को काफी वित्तीय लाभ पहुंचाया। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने आय से अधिक संपत्ति का निर्माण भी किया। जब मामले का खुलासा हुआ तो लंगा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 409 (लोक सेवक के रूप में संपत्ति के संबंध में आपराधिक विश्वासघात), 168 (लोक सेवक के रूप में अवैध रूप से व्यापार में संलग्न), 193 (झूठे व्यापार के लिए सजा), 465 (जालसाजी) और अन्य के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि लंगा पर रिश्वत लेने का भी आरोप है।