मुंबई के अंडरवर्ल्ड में कई ऐसे डॉन हुए जिन्होंने कई काले कारनामों को अंजाम दिया। आज हम बात कर रहे हैं उस कुख्यात कि जिसने सबसे बड़े माफिया को भी धमकी दे दी। बताया जाता है कि यह कुख्यात गैंगस्टर बहरीन में रहता है और वहीं से अपनी काली दुनिया को ऑपरेट करता है। यह डॉन कितना खतरनाक है? इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उसने साल 2010 में भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाउद इब्राहिम और उसकी डी-कंपनी के खिलाफ खुलेआम जंग का ऐलान कर दिया था। इतना ही नहीं उसने धमकी भी दी थी कि वो दाउद की हत्या कर देगा।
दरअसल साल 2010 में ‘Headlines Today’ ने एक ऑडियो टेप के बारे में दावा किया था कि यह ऑडियो डॉन अली बुदेश का है। इस ऑडियो टेप में अली बुदेश कथित तौर से दाउद इब्राहिम को धमकी देते और उसे लोमड़ी कहते हुए सुनाई दे रहा था। दावा किया गया था कि अली बुदेश ने कहा है कि ‘एक वक्त तक मैं दाउद के लिए भाई की तरह था और दाउद भी इस बात को मानता था। लेकिन बाद में मैं उसके लिए अली बुदेश हो गया, तुम्हें परिणाम भुगतना होगा।’
अली बुदेश के बारे में कहा जाता है कि उसने कहा था कि वो अरब का रहने वाला है। उसकी मां भारतीय हैं और पिता अरेबियन इसलिए वो अरब का है। हालांकि बाद में अली बुदेश के इंडियन कनेक्शन का भी पता चला था। खुलासा हुआ था कि बुदेश ने पुणे के नजदीक स्थित एक बोर्डिंग स्कूल से ही पढ़ाई की थी। पढ़ाई खत्म करने के बाद वो मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़ गया। यह भी पता चला था कि अली बुदेश मुंबई के घाटकोपर इलाके का रहने वाला था।
छोटे-छोटे अपराध कर बुदेश धीरे-धीरे गुनाह की दुनिया में बड़ा नाम बन गया। कहा जाता है कि ये शख्स खुद को ‘बाबा’ कहलवाना पसंद करता था। माना जाता है कि 80 के दशक में बाबा बुदेश, दाउद का खासमखास था। बाद में दाउद के साथ उसकी पटी नहीं तो उसने अपना अलग गिरोह बना लिया था। दाउद गिरोह के साथ उसके गिरोह की गैंगवार भी हुई थी। बुदेश ने अपना खतरनाक नेटवर्क तैयार किया था।
कुछ वक्त पहले मायानगरी से जुड़ी हस्तियों राकेश रोशन, मुकेश भट्ट और बोनी कपूर से रंगदारी मांगी गई थी। उस वक्त यह बात सामने आई थी कि यह रंगदारी अली बुदेश के नाम से ही मांगी गई है। पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक अली बुदेश बॉलीवुड प्रोड्यूसर और अभिनेता राकेश रोशन पर हुए हमले का मास्टरमाइंड अली बुदेश ही था।
कहा जाता है कि मुंबई में जब अली बुदेश और उसके गुर्गों का आतंक बढ़ा तब पुलिस ने उसपर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। पुलिस से डर कर अली बुदेश बहरीन भाग गया। बताया जाता है कि अली बुदेश ने बबलू श्रीवास्तव के साथ मिलकर दाउद और उसके गुर्गों के खिलाफ ऑपरेशन डी चलाया।
कहा जाता है कि मुंबई में एक प्रॉपर्टी डीलर को लेकर दाउद और बुदेश के बीच दुश्मनी बढ़ी थी। कहा जाता है कि जिस प्रॉपर्टी डीलर से रंगदारी बुदेश ने मांगी थी वो डीलर दाउद के टच में था और उसने दाउद के प्रभाव की वजह से ही बुदेश को पैसे देने से मना कर दिया। दाउद ने फोन पर बुदेश को हड़काया था और कहा था कि वो उस प्रॉपर्टी डीलर से दूर रहे लेकिन बुदेश पीछे हटने के लिए तैयार नहीं था। इसके बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। कहा जाता है कि दाउद की डी-कंपनी के ऑपरेटर माजिद मनिहार और परवेज तांडा की हत्या में बुदेश शामिल था।
