Delhi Violence, Delhi CAA Protest: दिल्ली में तीन दिनों की हिंसा ने 3 दर्जन से ज्यादा जिंदगानियां खत्म कर दीं। कत्ल और कोहराम की जो तस्वीरें अब इस हिंसा के बाद सामने आ रही हैं वो रोंगटे खड़ी कर देने वाली हैं। लेकिन कहते हैं इंसानियत के आगे बर्बरता हमेशा हारती है। दिल्ली के कुछ इलाकों में इस बर्बरता को मानवता से जिस तरीके से हराया वो एक नज़ीर है। यूं तो दिल्ली में दंगे ने जब सांप्रदायिक हिंसा का घिनौना रुप लिया तब कई घर जले लेकिन कुछ जगहों पर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी नजर आई। हिंसा फैलाकर हिंदू-मुस्लिम को बांटने और उन्हें आपस में लड़ाने की कोशिश में जुटे दंगाईयों को लोगों ने मुंहतोड़ जवाब भी दिया।
न्यू जाफराबाद भी हिंसा के वक्त खूनी चेहरों से घिरा हुआ था। लेकिन 24 फरवरी की शाम यहां रहने वाले हिंदू और मुस्लिम संप्रदाय के लोगों ने एक साथ मिलकर दंगाईयों को खूब सबक सिखाया। ‘नवभारत टाइम्स’ के मुताबिक इस दिन कत्ले-ए-आम और तबाही मचाने के मंसूबा लिए शाम को करीब 4 बजे एक भीड़ सुदामापुरी के रास्ते इस इलाके में घुसी।
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लाठी-डंडे, रॉड और चेन जैसे घातक हथियारों से लैस यह गुट गली नंबर 12 तक पहुंचा। लेकिन इससे पहले यह लोग अपने मंसूबे में कामयाब होते सुदामापुरी में हिंदू-मुसलमान इन दंगाईयों के सामने अड़ गए। दोनों संप्रदाय के लोगों ने गजब की एकता और दिलेरी दिखाते हुए दंगाईयों को ललकारा।
लोगों की एकजुटता देख दंगा फैलाने आई भीड़ की सांसें फूलने लगीं। हालत यह हो गई कि यह भीड़ अब खुद ही अपने बचने का रास्ता तलाशने लगी और इधर-उधर छिप कर जान बचाने लगी। इलाके के लोगों की एकता देख यह भीड़ वहां से भाग खड़ी हुई।
इसके बाद बुधवार की रात करीब 9.30 बजे और फिर इसी रात करीब 1.30 बजे भी उपद्रवी इस इलाके में दंगा फैलाने के लिए पूरी ताकत के साथ लौटे। लेकिन कहते हैं मोहब्बत के आगे नफरत कभी जीत नहीं सकती। दोनों ही बार इलाके के लोग एक बार फिर एकजुट हुए और ना सिर्फ दंगाइयों को वहां से भगाया बल्कि उन्हें खदेड़ भी दिया।
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कुछ ऐसी ही तस्वीर विजय पार्क की गली नंबर -17 में भी देखने को मिली। यमुना विहार में रहने वाले कुछ लोगों ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत के दौरान बताया कि दंगा फैलाने के मकसद से कॉलोनी में घुसने की कोशिश कर रहे लोगों को हिंदू और मुसलमानों ने मिलकर नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया।
यमुना विहार के सी-12 क्षेत्र में रहने वाले सुहैल मंसूरी ने ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से बातचीत में बताया कि ‘वह 20 साल से यहां रह रहे हैं। यहां आजतक सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई थी। यह पहली बार है, जब इस तरह से हिंसा हुई है और जब कभी दंगाई इधर आते थे तो हम लोग साथ मिलकर दंगाइयों को खदेड़ देते थे। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र की न किसी मस्जिद को आंच आई है और न ही किसी मंदिर को। दोनों धर्मों के धार्मिक स्थल बिल्कुल सुरक्षित हैं।
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इसी क्षेत्र में रहने वाले मंसूरी ने कहा कि उनके मुस्लिम से ज्यादा दोस्त तो हिंदू हैं। हम सब साथ रहते हैं। मंसूरी और इस इलाके में रहने वाले राहुल जैसे लोगों ने मीडिया वालों को बताया कि जिस वक्त हिंसा फैली थी उस वक्त कुछ लोग सी-12 मार्केट में घुस आए। हिंसा को हराने के लिए क्या मुस्लिम क्या हिंदू सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर उनका सामना किया और उन्हें वहां से दौड़ा कर ही दम लिया।
