Coronavirus, (COVID-19): कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। नई गाइडलान में कहा गया है कि धार्मिक स्थलों में सेनेटाइज़र का छिड़काव किया जाएगा ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। लेकिन मस्जिद में सेनेटाइज़र के छिड़काव को लेकर उलेमाओं और मौलानाओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बरेली और अमरोहा के उलेमाओं का कहना है कि सेनेटाइज़र हराम है।इसे मस्जिद में उपयोग में नहीं लाया जा सकता।
सुन्नी मरकज़ी दारूल इफ्ता, दरगाह आला हज़रत के मुफ्ती अब्दुर्रहीम नश्तर फारूक़ी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘मस्जिदों को सेनेटाइज करने का मतलब पूरी मस्जिद को नापाक करना है और नापाक जगह पर या नापाकी के साथ नमाज़ नहीं होगी।’ बरेलवी मसलक के उलेमा ने कहा कि ‘अल्लाह के घर (मस्जिद) को हम अल्कोहल मिले सेनेटाइज़र से नापाक नहीं होने देंगे।’ जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खां कादरी ने भी इससे पहले कहा था कि अल्कोहल युक्त सेनेटाइज़र का छिड़काव मस्जिदों में न होने दें।
हालांकि मस्जिद में सेनेटाइज़र के इस्तेमाल को लेकर मौलानाओं ने उलेमाओं से अलग बयान दिये हैं। जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ति असद कासमी का कहना है कि ‘धार्मिक स्थलों में जिस अल्कोहल का छिड़काव किया जा रहा है, उसमें अल्कोहल की मात्रा कम होती है और दवा वाला अल्कोहल पाक होता है।’
वहीं मुफ्ती अरशद फारुकी ने इस मामले पर कहा कि ‘अभी तक मस्जिदों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। जल्दबाजी में इसपर कोई राय नहीं बनानी चाहिए।’ जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा का कहना है कि ‘यह समझने की जरुरत है कि अल्कोहल अलग-अलग तरीके का होता है।’
बहरहाल आपको बता दें कि मस्जिदों में सेनेटाइज़र के इस्तेमाल करने को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं के अलग-अलग विचार के बीच सुन्नी बरेली मरकज के दारुल इफ्ता से जारी किए गए फतवे में मस्जिदों में अल्कोहल युक्त सेनेटाइज़र का छिड़काव करने को प्रतिबंधित करते हुए फतवा जारी कर दिया गया है। दारुल उलूम देवबंद ने इस फतवे का समर्थन किया है और जायज ठहराया है।
हालांकि इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा ने उलेमाओं की सोच को गलत बताया है। मोहसिन रजा ने कहा कि इस्लाम में जान बचाने के लिए सब जायज़ है।
