खतरनाक कोरोना वायरस के संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए देश भर में लॉकडाउन किया गया था। अभी देश में अनलॉक की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच पंजाब के डीसीपी अखिल चौधरी ने न्यूज एजेंसी ‘ANI’ से बातचीत में जानकारी दी है कि लॉकडाउन के दौरान पंजाब के लुधियाना में आत्महत्या और घरेलू हिंसा के मामला बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि इस साल लॉकडाउन से पहले राज्य में 60 आत्महत्या के केस जबकि घरेलू हिंसा के कुल 850 केस सामने आए थे।
वहीं लॉकडाउन के दौरान सुसाइड के 100 केस और घरेलू हिंसा के 1500 केस सामने आए हैं। आत्हत्या का आकंड़ा क्यों बढ़ रहा है? इसपर बातचीत करते हुए डीसीपी ने कहा कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि डिप्रेशन, बेरोजगारी और आर्थिक परेशानी यह कुछ ऐसी वजहें हैं जिसकी वजह से लोग आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। यह भी सामने आया है कि 30-40 वर्ष के आयु के लोगों के बीच आत्महत्या करने की प्रवृति बढ़ी है।
आपको बता दें कि बीते 14 मई को रणधीर सिंह नगर निवासी निजी स्कूल के एक कर्मचारी ने वीडियो कॉल पर अपनी पत्नी से बात करते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। उस वक्त यह बात सामने आई थी कि कर्मचारी एक निजी स्कूल में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करता था। उसने किसी से 2 लाख रुपए उधार लिए थे, जिस वजह से वह बेहद परेशान था। इसके अलावा एक 40 वर्षीय कर्ज में डूबे व्यक्ति ने 1 अप्रैल को आत्महत्या कर ली थी।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी एक जानकारी देते हुए बताया था कि लॉकडाउन के दौरान दहेज उत्पीड़न के मामलों में गिरावट आई है। आयोग की तरफ से बताया गया था कि पहले 25 दिनों में 44 केस सामने आए थे..जबकि लॉकडाउन के दौरान 37 मामले सामने आए।
इसी तरह पहले 25 दिनों में छेड़खानी के 25 मामले सामने आए जबकि लॉकडाउन के दौरान 15 शिकायतें मिलीं। इसके अलावा हेल्पलाइन को कोरोना वायरस को लेकर सवाल पूछने के लिए 1,677 कॉल प्राप्त हुए और 237 लोगों ने बीमार लोगों की मदद के लिए कॉल किया।
