अगर हिपोक्रेसी अर्थात डबल स्टैंडर्ड यानी दोहरे मापदंड पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाए तो भारत निश्चित रूप से जीत का प्रबल दावेदार होगा। भ्रष्टाचार हमारे लिए तभी तक बुरा है जब तक हम मेज के इस तरफ हैं। मेज के उस तरफ जाते ही बढ़ती महंगाई और परिवार के खर्चे याद आ जाते हैं। लाखों-करोड़ों के घोटालों में लिप्त भ्रष्ट नेताओं को कोसने वाली जनता भी अपना काम निकलवाने के लिए 100-50 रुपए ऊपर से देने को गलत नहीं मानती।
ठीक वैसे ही पहले हम अपनी नदियों को मां कहते हैं, फिर उनकी आरती करते हैं और फिर उन्हें ही प्रदूषित करते हैं। हिंदी फिल्मों के नायक-नायिका के लिए तालियां बजाने वाले अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों के अंतरजातीय विवाह को सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते।
बड़े गर्व से हम बताते हैं कि हमारी महान संस्कृति में स्त्री को देवी माना गया है। ठीक भी है, अब भला देवियों का इस दुनिया में क्या काम? इसीलिए तो हम बच्चियों को जन्म लेने से पहले ही मार देते हैं! पंजाब और हरियाणा का हाल देख कर समझ आता है कि समस्या गरीबी की नहीं बल्कि मानसिकता की है।
बेहतर होता अगर हम उन्हें आम इंसान ही मानते। सड़क पर खड़े होकर आती-जाती लड़कियों को छेड़ने वाले लड़के अपनी बहन के साथ कुछ ऐसा होने पर बर्दाश्त नहीं कर पाते। हर लड़की में ‘गर्लफ्रेंड’ ढूंढ़ने वाला भाई ही अपनी बहन के ‘ब्वॉयफ्रेंड’ की सबसे ज्यादा धुलाई करता है।
खैर, लिखने वाले तो लिखते ही रहेंगे। यहां किसे फर्क पड़ रहा है! शरीर नष्ट हो जाते हैं पर हिपोक्रेसी तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। लगता है, यहां सब ऐसे ही चलता रहेगा!
’अनिल हासानी, हलालपुर, भोपाल्
फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta
ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta
