दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम एपीजे अब्दुल कलाम रोड करने का जहां अधिकतर लोगों ने स्वागत किया है वहीं कइयों ने नाराजगी भी जताई है। औरंगजेब की नृशंसताओं से इतिहास अटा पड़ा है। क्या इस बात को हम भुला पाएंगे कि औरंगजेब ने कश्मीरी पंडितों के धर्मरक्षक (हिंद की चादर) गुरु तेगबहादुर सिंह की गर्दन सरेआम दिल्ली स्थित चांदनी चौक में धड़ से अलग करा दी थी। ऐसे नृशंस और आततायी शासक के नाम पर देश की राजधानी दिल्ली में किसी सड़क का नाम हो, क्या यह उचित लगता है? कश्मीर में धार्मिक और अन्य जगहों के जो नाम बदले गए या बदले जा रहे हैं, उनके बारे में हमारे विद्वान मित्र चुप क्यों हैं?
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर
प्रभावी कूटनीति
पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबों से भारत की सरजमीं पर कहर ढाता रहा है। पूर्ववर्ती सरकारों की लचर नीतियों और अति संयम को कमजोरी समझने का उसका भ्रम अब मोदी सरकार की त्वरित और व्यापक प्रतिक्रिया के कारण टूट भी रहा है। रक्षा मंत्री पर्रीकर ने संघर्ष विराम के उल्लंघन पर सेना को दोगुनी ताकत के साथ कड़े प्रतिकार के निर्देश दिए हुए हैं। जाहिर है, भविष्य में पाकिस्तान को सीमाओं और रिहायशी इलाकों पर अकारण गोलीबारी रोकनी ही होगी वरना उसके भीतर भी तबाही का मंजर ज्यादा खौफनाक होगा।
पिछले दिनों ड्रोन के झूठे आरोपों से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में हुई किरकिरी, दो आतंकवादियों के जिंदा पकड़े जाने और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता रद्द होने से उसकी कुंठा बढ़ गई है वहीं मोदी सरकार की प्रभावी कूटनीति के चलते अंतराष्ट्रीय स्तर पर वह अलग-थलग भी पड़ गया है।
’ कुलदीप घोड़ावत, मप्र
घटती सरकार
एक लोक-कल्याणकारी राज्य से कम से कम तीन चीजों की आशा की जाती है- शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य। लेकिन देखने में आ रहा है कि धीरे-धीरे राज्य अपनी इन तीनों जिम्मेवारियों को छोड़ता जा रहा है। बात पिछले शनिवार की है। मैं दर्द-बुखार से पीड़ित होकर जेएनयू के अस्पताल में दाखिल हुआ। लक्षण डेंगू के थे इसलिए डॉक्टर ने तुरंत सफदरजंग भेज दिया। रात ग्यारह बजे जब एंबुलेंस से सफदरजंग के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचा तो टेस्ट के लिए तुरंत ‘स्पोर्ट्स इंजुरी सेंटर’ जाने को कहा गया। शीशे की चमचमाती बिल्डिंग में जब जांच को पहुंचा तो गहरी