रेल मंत्री सुरेश प्रभु की भी क्या लीला है! उनके ट्वीट करते-करते भी यात्रियों की समस्याएं-दिक्कतें दूर नहीं हो पाई हैं। वही बदबू से भरे शौचालय जिनमें न पानी है न मग। वही टूटी-फूटी बोगियां जिनमें न सफाई है और न ढंग से बैठने की व्यवस्था। कुल मिला कर हमारे देश में रेल यात्रा आज भी एक यातना यात्रा बनी हुई है। मंत्रीजी खुद तो स्टेशनों के प्रतीक्षालय में वीआईपी आतिथ्य पा लेते हैं। कभी आम व्यक्ति की तरह वहां जाकर देखें कि प्रतीक्षालयों की क्या दुर्दशा है!
ट्वीट के अलावा भी अपने विभाग को सुधार सकते हैं लेकिन आप तो ट्वीटर पर ट्वीट-ट्वीट खेल रहे हैं। आखिर आम मजदूर, अनपढ़ किसान, गरीब बेरोजगार व्यक्ति कैसे ट्वीट कर अपनी समस्या बताए? आज भी भारी भीड़ और यात्रियों की बढ़ती परेशानी के बीच रेलवे अपनी गति (धीमी ही सही) बनाए हुए है। कई योजनाएं, जिनके अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं उन पर कार्य करना चाहिए है जिससे रेलवे को एक मजबूत ढांचे में तब्दील किया जा सके। किसान, गरीब, लाचार व्यक्ति का भी खयाल रखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। बुलेट ट्रेन के इस दौर में आज भी योजनाएं कागज के पन्नों पर रेंग रही हैं।
’विकास तिवारी, भोपाल</p>
