जब तक परीक्षाओं पर परीक्षाएं होंगी व्यापमं जैसे घोटाले होते रहेंगे? बड़ा सवाल यह है कि स्कूल अध्यापक के लिए बार-बार छात्रों को परीक्षा क्यों देनी पड़ती है। पहले बारहवीं की परीक्षा देता है फिर बीएड की परीक्षा पास करता है, इसके बाद अध्यापक बनने के लिए व्यापमं की परीक्षा देता है। आखिर एक मास्टर बनने के लिए कितनी परीक्षाएं देनी पड़ेंगी। मजेदार बात यह है कि परीक्षा कोई भी हो, सभी सरकारी संस्थाएं लेतीं। क्या सरकार को अपनी संस्था पर भरोसा नहीं है? अगर है तो व्यापमं की परीक्षा क्यों? सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल में हुए घोटाले की सीबीआइ जांच करेगी और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पुख्ता सबूत जुटाएगी।

मान लिया कि दोषियों को सजा भी मिल जाए और पूरे देश में वाहवाही भी हो जाए। इसके बाद भी क्या उन लोगों के साथ न्याय हो पाएगा, जो इस घोटाले का शिकार हुए हैं? उन्होंने नौकरी पाने के लिए रात-दिन आंखें फोड़ीं, बदले में आज भी सड़क पर चप्पल चटकाते घूम रहे हैं या फिर कहीं मामूली वेतन पर किसी की चाकरी करने पर मजबूर हैं। घोटाले के दोषियों को सजा मिलने के साथ व्यापमं जैसी परीक्षाओं के लिए ऐसी पुख्ता व्यवस्था हो ताकि आने वाले समय में ऐसे महाघोटाले की वापसी न हो सके।
वीरेंद्र कुमार विश्वकर्मा, भोपाल</strong>

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