स्मार्ट सिटी योजना के तहत देश के 98 शहरों को प्रति वर्ष सौ करोड़ की धनराशि मुहैया कराई जाएगी ताकि इनमें बिजली, सड़क, आवास, स्वच्छपर्यावरण आदि आधारभूत ढांचे का विकास करके सुनियोजित तरीके से इन्हें रोजगार सृजन और आय अर्जन के केंद्र के रूप में तैयार किया जा सके। लेकिन यह सौ करोड़ की राशि एक स्मार्ट सिटी के लिए बहुत अपर्याप्त है और ज्यादातर वे शहर चुने गए हैं जो पहले ही उन्नत और तुलनात्मक रूप से विकसित हैं।
बेहतर होता कि प्रति शहर अधिक धनराशि उपलब्ध करा कर राज्यों के कम विकसित और छोटे-छोटे शहर-कस्बों को चुना जाता ताकि रोजगार के अधिक पैदा होने से वहां के लोग शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर नहीं होते। इससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या के समाधान के साथ ही समावेशी आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल किया जाता।
सुभाष चंद्र मीणा दलपुरा, काका नगर, दिल्ली</strong>
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