इलाहाबाद हाइकोर्ट का शिक्षा की बदहाली पर चिंता जताना, नेताओं और अफसरों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कहना उस सामाजिक तबके की तरफदारी करता है जिसके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढते हैं। इसमें संदेह नहीं कि आज सरकारी स्कूल केवल गरीब तबके के बन कर रह गए हैं। गरीबों के बच्चे महंगी पढ़ाई होने के कारण चमक-दमक वाले प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूलों की शिक्षा से वंचित हैं।

सरकार की उपेक्षा के कारण उसके स्कूल बदहाल हैं। गरीबों के बच्चे ऐसे सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जहां न तो शिक्षक बच्चों की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान देते हैं और न बच्चों की सुविधा के लिए वहां संसाधन हैं। यदि हाईकोर्ट के फैसले का नेता, अफसर और सरकारी कर्मचारी पालन करते हैं तो इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदहाली दूर करने में मदद मिल सकती है।

पंकज भारत, गांव- भोला, मेरठ</strong>

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