बिहार में राजद और जद (एकी) के गठजोड़ में कांग्रेस के भी सम्मिलित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। क्या पता वाम दलों से भी किसी स्तर पर तालमेल बन जाए। पर सबसे अहम लालू और नीतीश का साथ आना है। लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, जम्मू, एक के बाद एक जीत का परचम लहराती भाजपा को दिल्ली में पराजय का स्वाद चखना पड़ा, वह भी इस तरह कि सत्तर में केवल तीन सीटें उसे मिल सकीं।
दिल्ली के चुनाव ने भाजपा को जो झटका दिया उससे उबरने का मौका बिहार है। लेकिन अब बिहार में मुकाबला उसके लिए आसान नहीं रह गया है। बिहार का असर आगे बंगाल पर भी पड़ेगा और उत्तर प्रदेश पर भी। लिहाजा, सबके लिए बिहार की अहमियत साफ है। अगर जनता परिवार बिहार की बाजी जीतने से रह गया, तो भाजपा फिर से अपराजेय नजर आएगी। अगर जनता परिवार ने बिहार की चुनौती से पार पा लिया, तो वह आगे चल कर भाजपा-विरोधी राजनीति की धुरी बन सकता है।
राजेश कुमार श्रीवास्तव, पटना</strong>
फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta
ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta
