प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीयों की तुलना में प्रवासी भारतीयों के बीच बोलना और घुलना-मिलना ज्यादा पसंद करते हैं। यही कारण है कि वे अपनी विदेश यात्राओं पर ज्यादा जोर देते हैं, इसकी तैयारी के लिए संसद में भी पिछले सत्र में कम ही गए, इतना हंगामा होने पर भी! विदेशी दौरों पर कितने प्रायोजित कार्यक्रम हो रहे हैं, जिसके लिए देश से ही न जाने कितने कलाकार और लोग पहले से ही उस देश में भेजे जाते हैं, इनका व्यय कौन वहन करता है यह जांच का विषय है!
देशवासी अब मोदीजी से कहने लगे हैं कि ज्यादा दिन विदेशों में न बिता कर हिंदुस्तान में गुजारिए। लालकिले की प्राचीर से जिन करोड़ों-करोड़ों रुपए की बचत की बात जोर-शोर से कही गई वह कहां गया? उसका लाभ क्या आम जनमानस को कभी मिलेगा या उसका कुछ भाग विदेशी यात्राओं पर ही अपव्यय होता रहेगा?
यश वीर आर्य, दिल्ली</strong>
फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta
ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta
