संसद में जारी गतिरोध के संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को जनता के ‘मन की बात’ भी सुननी चाहिए कि किसी के इस्तीफे को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाएं। अपने दल के तमाम सांसदों को संसद की गरिमा समझाएं, उन्हें कहें कि यह संसद है, सड़क नहीं। संसद जनता के हित में, संपूर्ण राष्ट्र के हित में कानून बनाने के लिए है न कि तोड़ने के लिए।

जिस कांग्रेस में सन 1968-69 से लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं है, जिस दल का अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ ‘गांधी’ परिवार से चला आ रहा है उसके नेता किस मुंह से लोकतंत्र के तकाजों की बात करते हैं! कांग्रेस के सांसद इस्तीफे की रट छोड़कर आर्थिक सुधार और देश के समग्र विकास में गहरी दिलचस्पी दिखाएं ताकि करोड़ों युवाओं को अतिशीघ्र रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।
हंसराज भट, मुंबई</strong>

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