भारत में क्रिकेट के मुकाबले बाकी खेल बहुत पीछे हैं। यह देखने को मिला एचआइएल की नीलामी में। इसमें भारतीय हॉकी टीम के कप्तान को उतने पैसे भी नहीं मिले जितने आइपीएल में अनजान क्रिकेटरों को मिल जाते हैं। हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद लोगों के दिलों में क्रिकेट जितनी जगह नहीं बना पाया है। बाजार भी क्रिकेट पर ज्यादा मेहरबान रहता है। यह बुरा नहीं है कि लोग क्रिकेट के दीवाने हैं पर कुछ ऐसा भी जरूर किया जाना चाहिए कि भारत के राष्ट्रीय खेल को भी लोग पसंद करें।
कफील अहमद फारूकी, नोएडा
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