दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सभी छात्र संगठन एक-दूसरे से भिड़ने की तैयारी में हैं लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय की वास्तविक समस्याओं के समाधान से शायद ही किसी दल का सरोकार हो। छात्रसंघ चुनाव तो एशिया के सबसे बडे छात्र संघ चुनावों में से एक है इसलिए इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। लेकिन दिल्ली विवि में द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र कहीं न कहीं इन चुनावों से दूर भागते हैं इसलिए हर वर्ष मत प्रतिशत गिरता चला जा रहा है। कम वोट पड़ने से गलत प्रत्याशी का भी चयन हो जाता है।
दिल्ली विवि छात्र संघ चुनाव की सबसे बडी कमी है कि यहां बहुत ज्यादा मात्रा में पोस्टरबाजी और पर्चेबाजी होती है जिसकी वजह से छात्रों को परेशानी होने के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान होता है। इस चुनाव में सभी छात्र संगठनों को यह प्रण लेने की जरूरत है कि वे पर्चेबाजी नहीं करेंगे। यदि उन्हें अपना प्रचार करना ही है तो उनके पास सोशल मीडिया जैसा एक अच्छा अस्त्र है। आज जरूरत है इस चुनाव में बदलाव लाने का और एक अच्छा नेता चुनने का।
आशुतोष सिंह, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, दिल्ली</strong>
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