वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को संसद में पास कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने की पहल के तहत सरकार ने कांग्रेस से संपर्क साधा है। गौरतलब है कि अर्थव्यवस्था को एकीकृत रूप दिए जाने और केंद्र-राज्यों के बीच कई स्तरों पर कर संबंधी जटिलताएं समाप्त करने के लिए वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम का मूर्त रूप लेना बेहद जरूरी है।
दुनिया के करीब डेढ़ सौ देश अपने यहां इस तरह की कर व्यवस्था लागू कर चुके हैं। लेकिन सवाल है कि संसद का विशेष सत्र बुलाया गया तो क्या उसमें सहमति के सुर मिलेंगे या एक बार फिर संसद महज अखाड़ा बन कर रह जाएगी?
राकेश कुमार, करावल नगर, दिल्ली</strong>
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