बिहार विधानसभा के चुनाव की तैयारी में सभी दल जोर-शोर से लगे हुए हैं। अपने लुभावने वायदों की सूची तैयार कर सब चुनावी दंगल में कूद चुके हैं, पर कोई प्रदेश की जनता से तो पूछे कि वह क्या चाहती है!
आज, जब बिहार की जनता अपने वर्तमान की तुलना इतिहास से करती है तो कुछ भ्रष्ट नेताओं और राजनेताओं के जरिए खुद को ठगा हुआ पाती है। सम्राट अशोक के शौर्य का साक्षी रहे, चाणक्य और आर्यभट्ट की बौद्धिकता के तेज से नहाए हुए, गौतम बुद्ध के ज्ञान की कार्यशाला और भी न जाने कितनी ऐतिहासिक समृद्धियों को अपने दामन में समेटे हुए बिहार का वर्तमान आज किन कारणों से विकास के परिधि से कोसों दूर है? यह एक गंभीर प्रश्न है। बिहार देश का तीसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है। ऐसा राज्य जिसकी करीब 58 फीसद आबादी 25 वर्ष से कम आयु के लोगों की है या कहें तो देश के सबसे ज्यादा युवाओं के राज्यों में से एक है बिहार।
लोग विश्व के अलग-अलग कोनों से विस्थापित होकर बिहार में बसे, पर आज आलम यह है कि नौकरी, व्यवसाय और शिक्षा के मद्देनजर सबसे ज्यादा पलायन बिहार से होता है। देश को सबसे ज्यादा प्रशासनिक अधिकारी, इंजीनियर और डॉक्टर देने वाले राज्य ने संसाधनों की ऐसी कौन-सी आपदा झेली जो 2011 की जनगणना में 63.82 फीसद साक्षरता दर के साथ उसे देश के राज्यों के बीच शिक्षा में सबसे निचले पायदान पर खड़ा कर दिया? अकादमिक शिक्षा के खराब स्तर, गरीबी, बिजली और पानी की पूरी आबादी तक पहुंच न होना, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सबसे महत्त्वपूर्ण पलायन की समस्या आज भी बिहार में प्रासंगिक है। सरकारें बदलती रहती हैं, पर समस्याओं का कद दिन पर दिन बढ़ता ही रहा है।
ऐसा कहा जाता है कि देश की राजनीति की दशा और दिशा के निर्धारण में बिहार की जनता की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। आज जरूरत आ पड़ी है कि यहां की जनता अपनी राजनीतिक चेतना को जगा कर मंडल-कमंडल, जात-पात या धर्म के नाम पर की जाने वाली तुच्छ राजनीति से ऊपर उठ विकास के पक्ष में, भ्रष्टाचार के खिलाफ और जन कल्याण के लिए अपना वोट दे। (शुभम श्रीवास्तव, गाजीपुर)
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