डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के प्रति देश भर में जो सम्मान और प्यार व्यक्त किया गया वह अद्भुत है। लेकिन यहां सवाल है कि डॉ कलाम नायाब थे तो उन्हें सभी राजनीतिक दलों ने दोबारा राष्ट्रपति क्यों नहीं बनाया? क्या हम व्यक्ति के जाने के बाद ही उसका महत्त्व समझते हैं? या हर बात को राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से देखते हैं?
डॉ कलाम को इसी शर्त पर दोबारा राष्ट्रपति बनना मंजूर था कि सभी दल उन्हें समर्थन दें। गैर राजनीतिक व्यक्ति होने के कारण वे चुनावी प्रक्रिया में आकर और विजयी न होने पर अपमानित होने वाले व्यक्ति नहीं थे। राष्ट्रपति पद से निटायर होने के बाद भी अपने जीवन के अंतिम क्षण तक वे देश के विकास में लगे रहे। उनकी मौत पर कोई राजनीति न करे।
यश वीर आर्य, दिल्ली</strong>
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