अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को साफ-सुथरी सरकार देने का वादा किया था लेकिन सबसे पहले उनके ही कानून मंत्री को जेल का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा था हम सरकारी ‘बंगला’ नहीं लेंगे। फिर सरकारी बंगला भी ले लिया।
यहां तक भी ठीक था। लेकिन केजरीवाल ने तो अपनी सरकार की ‘ब्रांडिंग’ शुरू कर दी है। वह भी छोटे नहीं, बड़े पैमाने पर। दिल्ली के बजट में प्रचार के मद में करीब सवा पांच सौ करोड़ रुपए का प्रावधान गले से नहीं उतरता। आप ने कांग्रेस पार्टी पर फिजूलखर्ची के बेतहाशा आरोप लगाए और जनता का भी भरपूर समर्थन मिला। लेकिन केजरीवाल सरकार ने तो कांग्रेस सरकार के विज्ञापन के बजट बीस से पच्चीस करोड़ रुपए की सीमा को लांघ कर उसमें इक्कीस गुना इजाफा कर दिया।
इसका मतलब आपको अपने काम पर विश्वास नहीं है जिसे विज्ञापनों के सहारे जनता को बताना पड़ रहा है। जितनी रकम आपने अपनी सरकार के विज्ञापनों पर खर्च की उससे कई स्कूल खुल जाते। गरीबों के लिए आवास की कमी पूरी करने में मदद मिल जाती। मगर नहीं, अब तो आप राजनीति की मंडी में आ गए हैं लिहाजा, सब्जी तो बेचनी ही पड़ेगी। लेकिन आप थोड़े उच्च स्तर के सब्जी बेचने वाले बन गए हैं क्योंकि आपने जनता के ख्वाब ही बेच दिए!
पुनीत सैनी, शांति मोहल्ला, दिल्ली
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