वर्तमान समय में बेरोजगारी का दंश झेलता योग्य, कर्मठ युवा वर्ग सरकार से अपनी मन:स्थिति और बेबसी को समझने की अपेक्षा कर रहा है। उत्तर प्रदेश में उनहत्तर हजार शिक्षकों की भर्ती के लगभग दो साल तक लटके रहने के बाद चयन सूची में नाम आने के बाद भी लगभग आधे अभ्यर्थियों को नियुक्त पत्र मिला, लेकिन आधे से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
विगत दो वर्षों से नियुक्ति का आस में पीड़ा, प्रताड़ना, कुंठा, अवसाद को झेलते हुए कुछ अभ्यर्थी आत्महत्या जैसे कदम भी उठा चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय में लगभग तीन महीने से सुरक्षित फैसले के आने की आस में अभ्यर्थी टूट रहे हैं।
सरकार द्वारा की गई पिछली तीन शिक्षक भर्तियां दरअसल चुनाव या उपचुनावों के मद्देनजर आनन-फानन में कराई गईं। इससे अभ्यर्थियों के बीच यह शंका बैठ रही है कि बाकी बची सीटों को कहीं 2022 चुनावों तक न लटका दिया जाए।
क्या ईमानदारी, लगन और मेहनत से पढ़ाई कर चयन सूची में स्थान पाने के बाद भी परीक्षार्थियों का भविष्य अंधकारमय रहना अन्याय नहीं है?
’महेंद्र नाथ चौरसिया, सिद्धार्थनगर, उप्र

