Stock Market Crash: शेयर बाजार में मंगलवार के कारोबारी सत्र में अफरा-तफरी देखने को मिली। भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) लाल निशान पर बंद हुए। सेंसेक्स 1065.71 अंक की गिरावट के साथ 82,180.47 अंक के आस-पास बंद हुए। वही, निफ्टी 353 अंक की गिरावट के साथ 25,232.50 अंक के आस-पास बंद हुए।
बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच रिलायंस, बजाज फाइनेंस और M&M जैसे बड़े शेयरों में भारी बिकवाली के दबाव की वजह से मंगलवार को स्टॉक मार्केट ये गिरावट देखने को मिली।
आज शेयर बाजार की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई थी। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 311.33 अंक टूटकर 82,934.85 अंक पर जबकि एनएसई निफ्टी 99.5 अंक फिसलकर 25,486 अंक पर पहुंच गया था।
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सेंसेक्स की 30 कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से, इटरनल में 4.02 परसेंट की गिरावट आई, इसके बाद बजाज फाइनेंस (3.88 परसेंट), सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फिनसर्व का नंबर रहा। इसमें से सिर्फ HDFC बैंक को फायदा हुआ।
एशियाई मार्केट का हाल
एशियाई मार्केट में, साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स, जापान का निक्केई 225 इंडेक्स, शंघाई का SSE कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स नीचे बंद हुए। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, सोमवार को विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने 3,262.82 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DII) खरीदार बने रहे और उन्होंने 4,234.30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये डूबे
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप मंगलवार को 455.78 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, जो इसके पिछले कारोबारी दिन 465.68 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तरह बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप आज करीब 9.90 लाख करोड़ रुपये कम हुआ है। अगर हम दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों की संपत्ति में करीब 9.90 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
शेयर बाजार में क्यों मची अफरा-तफरी?
ग्रीनलैंड को लेकर ग्लोबल चिंताएं
आज मार्केट में गिरावट का एक मुख्य कारण बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता है। अमेरिका और यूरोप के बीच नए भू-राजनीतिक तनाव सामने आने के बाद निवेशक बढ़ते ट्रेड वॉर के रिस्क को लेकर परेशान हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भरोसा जताया कि अमेरिका और यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रशासन के कब्जे के मकसद पर कोई समाधान निकाल लेंगे और संभावित ट्रेड वॉर को लेकर “घबराहट” को खारिज कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों से आयात पर टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो ग्रीनलैंड पर कब्जे का विरोध कर रहे हैं। EU नेता गुरुवार को ब्रसेल्स में एक इमरजेंसी समिट में संभावित जवाबी कार्रवाई पर चर्चा करने वाले हैं। इसके अलावा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से 20 जनवरी को ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ पॉलिसी पर नए फैसले सुनाने की उम्मीद है। निवेशक इस अहम फैसले से पहले सतर्क हैं।
वित्तीय नतीजों का सीजन
चल रहे तीसरी तिमाही के अर्निंग्स सीजन से अब तक ज्यादा राहत नहीं मिली है। कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं, कई कंपनियों ने धीमी ग्रोथ की रिपोर्ट दी है। नए लेबर नियमों से जुड़े बदलावों सहित वन-टाइम फैक्टर्स के असर ने भी कमाई की स्थिति को धुंधला कर दिया है।
बड़े मार्केट को ज्यादा नुकसान
बड़े मार्केट में नुकसान ज्यादा हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक अब ज्यादा करेक्शन का सामना कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, मीडिया, मेटल्स, फार्मास्यूटिकल्स और फाइनेंशियल जैसे सेक्टोरल इंडेक्स सभी 1-2% की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
ग्लोबल अनिश्चितता के बीच वोलैटिलिटी बनी रहेगी
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, निकट भविष्य में मार्केट में वोलैटिलिटी ऊँची बनी रहने की उम्मीद है क्योंकि निवेशक बढ़ते ग्लोबल तनावों, खासकर ग्रीनलैंड से जुड़े संभावित टैरिफ एक्शन को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच गतिरोध पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं।
