भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत आने में अभी और देर हो सकती है। इसका कारण यह है कि ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने नीरव को लंदन की मजिस्ट्रेट कोर्ट के भारत प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील करने की मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य और मानव अधिकारों के आधार पर नीरव मोदी को यह राहत दी है। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के घोटाले में फरार चल रहा है।

हाईकोर्ट की जस्टिस मार्टिन चैंबरलिन ने कोविड-19 नियमों के तहत रिमोट सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया है। नीरव मोदी की कानूनी टीम ने गंभीर अवसाद और आत्महत्या की नौबत जैसे तर्क कोर्ट के सामने रखे थे, जिसके बाद कोर्ट सुनवाई के लिए राजी हुआ था। जस्टिस मार्टिन नीरव मोदी की कानूनी टीम के उस तर्क से भी सहमत दिखी जिसमें कहा गया था कि आत्महत्या के प्रयासों को रोकने के लिए मुंबई की ऑर्थर रोड जेल पर्याप्त उपायों पर बहस करने की जरूरत है। आपको बता दें कि नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण के बाद ऑर्थर रोड जेल में ही रखा जाना है।

इन आधारों पर दी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील की मंजूरी: जस्टिस मार्टिन ने आर्टिकल तीन के ग्राउंड 3 और 4 के आधार पर नीरव मोदी को प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने की मंजूरी दी है। आर्टिकल तीन के ग्राउंड 3 और 4 यूरोपियन कन्वेंशन के मानव अधिकारों से जुड़े हैं। यानी यह जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकार से जुड़े हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने ब्रिटेन के क्रिमिनल जस्टिस एक्ट 2003 को भी मान्यता देती है। यह कानून अपीलकर्ताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने फरवरी में दी थी प्रत्यर्पण की मंजूरी: लंदन की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसी साल फरवरी में नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके बाद अप्रैल में ब्रिटेन सरकार ने भी नीरव के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी। ब्रिटेन सरकार के फैसले के बाद नीरव मोदी के पास ब्रिटेन की हाईकोर्ट में अपील का विकल्प बचा था। अब नीरव मोदी की अपील पर हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले पर अपील करने की मंजूरी दे दी है। इससे नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण में देरी हो सकती है।

नीरव मोदी पर आरोप: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर पीएनबी की बार्टी हाउस शाखा से फर्जी ऋृणपत्रों के माध्यम से 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक का लोन लेने का आरोप है। इस मामले में बैंक के अधिकारी भी शामिल पाए गए थे। लोन की राशि से नीरव मोदी ने कई पोंजी स्कीम शुरू की थीं। इस मामले में नीरव मोदी की पत्नी एमी मोदी, भाई निशल मोदी और मामा मेहुल चोकसी भी आरोपी हैं।

2019 में गिरफ्तार हुआ था नीरव मोदी: नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को लंदन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि, वह लंबे समय से एंटीगुआ और बारबुडा में रहा रहा है। नीरव मोदी ने भारतीय एजेंसियों पर अपहरण करने और एंटीगुआ ले जाने का भी आरोप लगाया था।

13,109.17 करोड़ रुपए की वसूली: उधर प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में कहा है कि भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या की जब्त संपत्ति की बिक्री करके अभी तक 13,109.17 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है। यह संपत्ति प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत जब्त की गई थी।