SBI Research Report : पिछले दो दशकों में भारतीय बैंकों में बड़े बदलाव हुए हैं. एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों की तादाद पिछले 20 साल में दोगुने से ज्यादा हो गई है. इतना ही नहीं, कुल कर्मचारियों में अफसरों का अनुपात जबरदस्त ढंग से बढ़ा है. इसके अलावा बैंकों के क्रेडिट और एडवांस तो पिछले 10 साल में ही करीब तीन गुना बढ़ गए हैं. इन पॉजिटिव डेवलपमेंट्स के बीच अनसिक्योर्ड लोन का बढ़ता हिस्सा चिंता की बात है. एसबीआई रिसर्च की आज यानी 12 जनवरी 2026 को जारी इस रिपोर्ट (Indian Banking Sector: A Trend Analysis) की बड़ी बातों पर एक नजर :

20 साल में दोगुने से ज्यादा हुए बैंक कर्मचारी

SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बैंकों में कुल कर्मचारियों की संख्या पिछले 20 साल में करीब दोगुनी हो गई है. 20 साल पहले यह संख्या करीब 8.6 लाख थी, जो अब बढ़कर 18.1 लाख तक पहुंच चुकी है. इनमें करीब 46 प्रतिशत कर्मचारी प्राइवेट बैंकों में काम कर रहे हैं, जबकि 42 फीसदी कर्मचारी पब्लिक सेक्टर बैंकों में हैं. यह आंकड़ा साफ करता है कि बैंकिंग सेक्टर में रोजगार के बढ़ते अवसरों में प्राइवेट बैंकों का बड़ा योगदान है.

अफसरों के बढ़ते अनुपात का क्या है मतलब 

रिपोर्ट में एक अहम जानकारी यह भी निकलकर आई है कि बैंकों में अफसरों का हिस्सा 20 साल पहले 36 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 76 फीसदी तक पहुंच गया है. यह बदलाव इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि बैंक अब स्किल-बेस्ड और हाई-वैल्यू वर्क पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी, रिस्क मैनेजमेंट, क्रेडिट एनालिसिस और डिजिटल बैंकिंग जैसे कामों में बेहतर स्किल वाले लोगों की मांग तेजी से बढ़ी है.

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कोविड के बाद बैंकों की मजबूत रिकवरी

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कोविड महामारी के बाद भारतीय बैंकों की फाइनेंशियल हेल्थ में मजबूत रिकवरी देखने को मिली है. SBI रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2020-21 के बाद बैंकों की एसेट ग्रोथ में जोरदार तेजी हुई है. FY21 में जहां बैंकों के कुल एसेट्स GDP के 77 प्रतिशत के आसपास थे, वहीं FY25 तक यह बढ़कर 94 फीसदी पर पहुंच गए. 

एसेट साइज में ऐतिहासिक उछाल

लंबी अवधि में देखें तो भारतीय बैंकों के एसेट साइज में जबरदस्त उछाल आया है. वित्त वर्ष 2004-05 (FY05) में बैंकों का कुल एसेट साइज जहां 23.6 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में यह बढ़कर 312.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इस दौरान FY15 से FY21 के बीच ग्रोथ कुछ सुस्त पड़ी थी, लेकिन इसके बाद इसकी रफ्तार तेज हुई, जिसने बैंकिंग सिस्टम को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया.

डिपॉजिट और एडवांस 10 साल में करीब 3 गुना बढ़े

SBI रिपोर्ट के मुताबिक FY15 से FY25 के बीच बैंक डिपॉजिट 85.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 241.5 लाख करोड़ रुपये हो गए, यानी करीब 2.83 गुना. इसी अवधि में एडवांस भी 67.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 191.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए. रिपोर्ट के मुताबिक एडवांस में ग्रोथ की रफ्तार डिपॉजिट से तेज रही है, जो मजबूत क्रेडिट डिमांड और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है.

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बचत की बदलती आदतें 

FY21 में जहां देश के बैंकों में क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 69 प्रतिशत था, वहीं FY25 में यह बढ़कर 79 फीसदी पर पहुंच गया. इसका मतलब ये हुआ कि बैंक अब अपने पास जमा किए जाने वाले पैसों का ज्यादा बड़ा हिस्सा कर्ज के रूप में दे रहे हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई राज्यों में लोगों का रुझान अपने पैसों को निवेश करने की ओर बढ़ रहा है. ऐसे राज्यों में गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं, जिनमें बैंक डिपॉजिट से पैसे धीरे-धीरे फाइनेंशियल मार्केट्स की ओर जा रहे हैं.

अनसिक्योर्ड लोन के साथ बढ़ा जोखिम

रिपोर्ट का एक चिंताजनक पहलू अनसिक्योर्ड लेंडिंग में तेज बढ़ोतरी है. FY05 में जहां ऐसे लोन करीब 2 लाख करोड़ रुपये थे, वहीं FY25 में यह रकम बढ़कर 46.9 लाख करोड़ रुपये हो गई. कुल एडवांस में इनकी हिस्सेदारी भी 17.7 प्रतिशत से बढ़कर 24.5 फीसदी पर पहुंच गई है. यह रुझान बैंकिंग सिस्टम के लिए मुनाफे के साथ-साथ जोखिम भी बढ़ाता है, जिस पर कड़ी निगरानी जरूरी होगी.

बदलते दौर में बैंकिंग का ट्रेंड 

कुल मिलाकर SBI की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर सिर्फ बड़ा नहीं हुआ है, बल्कि ज्यादा प्रोफेशनल, ज्यादा क्रेडिट-ड्रिवन और ज्यादा रिस्क-सेंसिटिव भी बन गया है. कर्मचारियों के प्रोफाइल से लेकर आम लोगों की निवेश से जुड़ी आदतों तक, हर स्तर पर बदलाव साफ नजर आ रहा है.