भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2025 की गोल्ड खरीदारी आठ साल में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने 2025 में कुल 4.02 टन सोना खरीदा, जबकि 2024 में यह 72.6 टन था। पिछले साल के मुकाबले, RBI ने 2025 में लगभग 94% कम सोना खरीदा।
कितना है आरबीआई के पास सोना?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास इस मंदी के बावजूद कुल सोने की होल्डिंग रिकॉर्ड 880.2 टन है। यह 2024 के आखिर में 876.18 टन थी।आरबीआई के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में सोने का हिस्सा भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। नवंबर 2025 तक आरबीआई का सोने पर आधारित फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा था।
साल 2024 में सोने का जमा होना और 2025 में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने रिजर्व बैंक के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में सोने का हिस्सा काफी बढ़ा दिया है, जो एक वर्ष के अंदर करीब 10% से बढ़कर 16% हो गया है।
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RBI के डेटा से पता चलता है कि मार्च 2021 में भारत के फॉरेक्स रिजर्व (डॉलर में) में सोने का हिस्सा 5.87% था। सिर्फ़ पाँच सालों में, RBI का गोल्ड एसेट्स में एलोकेशन लगभग 6% से बढ़कर 16% हो गया है। सभी गोल्ड डिपॉजिट देश में नहीं रखे जाते हैं, क्योंकि RBI के गोल्ड रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा विदेश में वॉल्ट में स्टोर किया जाता है।
5 मई को पब्लिश हुई आरबीआई की फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के मैनेजमेंट पर हाफ ईयरली रिपोर्ट में लिखा है, “मार्च 2025 तक, रिजर्व बैंक के पास 879.59 मीट्रिक टन सोना था, जिसमें से 511.99 मीट्रिक टन देश में रखा गया था। जबकि 348.62 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और बैंक फ़ॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास सेफ़ कस्टडी में रखा गया था, 18.98 मीट्रिक टन सोना डिपॉजिट के रूप में रखा गया था।”
सेंट्रल बैंकों के पास कितना है सोना?
दिसंबर 2025 तक सेंट्रल बैंकों के पास अब आधिकारिक रूप से 32,140 टन सोना है। सेंट्रल बैंक की खरीदारी का सिलसिला 2022 में शुरू हुआ था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2022 में ग्लोबल सेंट्रल बैंकों ने 1,082 टन, 2023 में 1,037 टन और 2024 में रिकॉर्ड 1,180 टन सोना खरीदा। 2025 में सेंट्रल बैंकों द्वारा 1,000 टन का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।
केंद्रीय बैंकों के पास मौजूद विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 20% है, जो डॉलर की 46% हिस्सेदारी के बाद दूसरे स्थान पर है। यह यूरो की 16% हिस्सेदारी से भी अधिक है। इसके अलावा, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के पास अब अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से अधिक सोना है। 1996 के बाद पहली बार केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से अधिक सोना है।
केंद्रीय बैंकों की खरीद में 2025 की पहली दो तिमाहियों में गिरावट का रुझान दिखना शुरू हो गया, जब पहली तिमाही में 244 टन सोना खरीदा गया और दूसरी तिमाही में 166 टन सोना खरीदा गया।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीद के कारण 2022 से सोने की कीमतों में लगभग 175% की वृद्धि हुई है। 2025 में निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश जारी रखने के कारण सोने की कीमतों में 65% से अधिक की वृद्धि देखी गई।
सर्वकालिक उच्च स्तर पर सोना
सोने-चांदी की कीमतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने से चांदी की कीमतों में मंगलवार (20 जनवरी 2026) को रिकॉर्ड तोड़ उछाल जारी रहा और यह 3.2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई। वहीं सोने के वायदा भाव में भी तेजी आई और यह 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यहां पढ़ें पूरी खबर…
