राहुल बजाज ने बजाज फाइनेंस कंपनी के चेयरमैन पद से हटने का फैसला लिया है। 31, जुलाई 2020 को वह कंपनी के गैर-कार्यकारी चेयरमैन का पद छोड़ देंगे। हालांकि कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर काम करते रहेंगे। उनकी जगह बेटे संजीव बजाज 1 अगस्त से गैर-कार्य़कारी चेयरमैन के तौर पर जिम्मा संभालेंगे। फिलहाल संजीव बजाज कंपनी में वाइस चेयरमैन के तौर पर काम देख रहे हैं। बजाज फाइनेंस की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में संजीव बजाज की नियुक्ति का फैसला लिया गया है। बजाज कंपनी को बीते 56 साल से अपनी सेवाएं दे रहे राहुल बजाज को राजनीतिक तौर पर भी मुखर व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है। उनके पिता कमलनयन बजाज महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के बेहद करीबी थी। यहां तक कि विनोबा भावे राहुल बजाज के टीचर थे।

राहुल बजाज पर लिखी एक पुस्तक के मुताबिक उनका नाम भी खुद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने ही रखा था। बजाज फैमिली स्वतंत्रता के संघर्ष के दौर में कांग्रेस पार्टी की बेहद करीबी थी। राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज महात्मा गांधी के अनुयायी थे और कांग्रेस को आर्थिक मदद किया करते थे। कुछ वक्त के लिए वह पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रहे थे, जबकि राहुल बजाज के पिता कमलनयन बजाज सांसद भी रहे। दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से बीए करने वाले राहुल बजाज ने कारोबारी जीवन की शुरुआत काफी पहले ही कर दी थी।

राहुल बजाज: ग्रेट पर्सनेलिटीज ऑफ इंडिया पुस्तक के मुताबिक दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद वह मुंबई में लॉ की पढ़ाई कर रहे थे और उसके साथ ही उन्होंने फैमिली बिजनेस में भी हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। सुबह राहुल बजाज कॉलेज जाते थे तो शाम उनकी बजाज इलेक्ट्रिकल्स में गुजरती थी। राहुल बजाज को बेहद जमीनी व्यक्ति के तौर पर जाना जाता रहा है। कहा जाता है कि जब उन्होंने बजाज ऑटो कंपनी जॉइन की तो वह अपनी पत्नी के साथ फैक्ट्री परिसर में ही रहने लगे। दोनों तीन दशकों तक फैक्ट्री परिसर में ही रहे।

1987 से ही बजाज फाइनेंस के चेय़रमैन के तौर पर जिम्मेदारी संभालने वाले राहुल बजाज अब धीरे-धीरे अपने बेटों को बिजनेस में सक्रिय कर रहे हैं। संजीव बजाज के अलावा उनके दूसरे बेटे राजीव बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम देख रहे हैं। बजाज ग्रुप देश के सबसे पुराने कॉरपोरेट घरानों में से एक है। फिलहाल बजाज ऑटो, बजाज फाइनेंस, बजाज इलैक्ट्रिकल्स, बजाज हिंदुस्तान जैसी कंपनियां इसका प्रमुख हिस्सा हैं। बजाज ऑटो टू व्हीलर और थ्री व्हीलर बनाने में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है। राहुल बजाज की लीडरशिप में कंपनी ने मोटरसाइकिल और स्कूटर बनाना शुरू किया था। इसके बाद ही बजाज स्कूटर घर-घर की पहचान बन गई थी। यहां तक कि स्कूटर खरीदने के लिए नंबर लगावाना होता था। कहा जाता है कि उस दौर में बजाज चेतक स्कूटर के लिए नंबर लगवाना होता था।