कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तेल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पूर्व वित्त मंत्री ने दावा किया कि तेल की कीमतें 25 रुपये प्रति लीटर तक कम की जा सकती हैं, लेकिन सरकार अपने फायदे के लिए कीमतें कम नहीं कर रही। चिदंबरम ने बुधवार को ट्विटर पर कहा, “कीमतें 25 रुपये प्रति लीटर तक कम की जा सकती हैं, लेकिन सरकार ऐसा नहीं करेगी। वे पेट्रोल की कीमत एक या दो रुपये कम करके लोगों को धोखा देंगे।”
चारों महानगरों में मंगलवार को तेल की कीमतों में करीब 30 पैसे की वृद्धि हुई। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल की कीमत बढ़कर 76.87 प्रति लीटर और मुंबई में 84.70 प्रति लीटर पर पहुंच गया। चिंदबरम ने कहा, “सरकार को पेट्रोल पर प्रति लीटर 25 रुपये का मुनाफा हो रहा है। यह पैसों पर आम उपभोक्ताओं का हक है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से प्रति लीटर पेट्रोल पर 15 रुपये बचा रही है और इसके अलावा वह प्रति लीटर पेट्रोल पर 10 रुपये का अतिरिक्त कर भी लगा रही है।
Central government saves Rs 15 on every litre of petrol due to fall in crude oil prices. Central government puts additional tax of Rs 10 on every litre of petrol.
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) May 23, 2018
बता दें कि पेट्रोल के बढ़े दामों के चलते केंद्र सरकार के चार साल पूरा होने पर सौ से ज्यादा संगठन मिलकर ‘पोल खोल-हल्ला बोल’ अभियान के तहत 23 मई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इन प्रदर्शनों में आयोजक संगठनों के साथ ही जनता भी हिस्सेदारी करेगी। कई सामाजिक संगठनों व प्रगतिशील समूहों से मिल कर बने मंच जन एकता-जन अधिकार आंदोलन की तरफ से मंच के सदस्य प्रेमनाथ राय ने आईपीएन को बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने ‘अच्छे दिन’ और ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा दिया था। यह भी कहा था कि विदेश से काला धन वापस आयेगा और सभी के खाते में 15 लाख रुपये आएंगे। लेकिन मोदी सरकार ने अपने किए गए वायदों में से किसी को भी पूरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इन चार वर्षों में मजदूरों, किसानों, छात्रों, नौजवानों, महिलाओं, दलितों एवं अल्पसंख्यकों पर जहां हमले तेज हुए हैं, वहीं महंगाई में बेतहाशा वृद्धि हुई है और तो और डीजल और पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जिलों में धरना-प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला इस रूप में कर रही है कि अब जिलाधिकारी कार्यालयों-कचेहरी पर धरना प्रदर्शन स्थल पर रोक लगाई जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों में लाखों पद रिक्त पड़े हैं, उन पर नई नियुक्तियां नहीं हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संगठनों ने 16 मई से 22 मई तक प्रदेश में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। इस दौरान 10 लाख से ज्यादा पर्चे जनता में वितरित किए गए। अभियान के समापन के दिन 23 मई को प्रदेश की राजधानी सहित सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसी क्रम में लखनऊ में सारे संगठनों के कार्यकर्ता कैसरबाग में एकत्रित होंगे और जुलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय तक जाएंगे।
