Lucknow-Kanpur Expressway: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने देश भर में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों से इंटर-सिटी ट्रैवल में बड़ा सुधार होने और इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ऐसी ही एक परियोजना है- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: ट्रैवल टाइम और खर्च
63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के साथ यात्रा में लगने वाला समय घटकर करीब 30 मिनट रहने की उम्मीद है। बता दें कि अभी लखनऊ से कानपुर के बीच की दूरी तय करने में 1.5 से 3 घंटे तक का वक्त लग जाता है। इस प्रोजेक्ट पर 4200 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आने की उम्मीद है। मॉडर्न और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के रूप में डिज़ाइन किया गया यह एक्सप्रेसवे मौजूदा रास्तों पर यातायात को कम करेगा, सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा और ईंधन की खपत को घटाएगा।
इसके अलावा, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) से भी कनेक्ट किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि पूर्वी और पश्चिमी यूपी दोनों तरफ के लिए यात्रा में लगने वाला समय और दूरी दोनों कम हो जाएंगे।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। यह एक्सप्रेसवे बाजारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोज़गार तक पहुंच को बेहतर बनाकर किसानों, छात्रों, व्यवसायों और उद्योगों को लाभ पहुंचाएगा जिससे उत्तर प्रदेश में विकास के कैटालिस्ट के रूप में इसकी भूमिका और मज़बूत होगी।
छात्रों और संस्थानों के लिए एक्सप्रेसवे बनने से आसानी हो जाएगी। विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों और अस्पतालों के लिए एक्सेस आसान होगा जिससे क्षेत्र में जिससे शैक्षणिक गतिशीलता और विकास को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, सड़क परियोजना उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों के बीच एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।
भविष्य के हिसाब से इन्फ्रास्ट्रक्चर
NHAI के अनुसार, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे एक भविष्य के लिए तैयार इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जिसने जटिल विकास चुनौतियों को दूर किया है। इसे एडवांस्ड इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस का इस्तेमाल करके बनाया गया है जिनमें अनेक वाहन एवं पैदल यात्री अंडरपास, बॉक्स कलवर्ट, रीइन्फोर्स्ड सॉइल (आरएस) दीवारें और अच्छी तरह से प्लान किए गए इंटरचेंज शामिल हैं ताकि स्मूथ ट्रैफिक फ्लो, सुरक्षित क्रॉसिंग्स और प्रभावी जल निकासी (ड्रेनेज) सुनिश्चित की जा सके।
