ग्रो (Groww) नवंबर 2025 में जब शेयर मार्केट में शामिल हुआ, तो यह पल पूरे भारतीय स्टार्टअप जगत में खूब चर्चा में रहा। लिस्टिंग के साथ ही लोगों की नजर ललित केशरे पर टिक गई। एक ऐसा व्यक्ति, जो कभी सोचता था कि अगर एक महीने में 100 ग्राहक मिल जाएं तो यह बड़ी सफलता होगी और आज उसी कंपनी का मार्केट में उतरना उनके सफर का बेहद खास और गर्व से भरा लम्हा बन गया।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, 44 वर्षीय ललित केशरे के पास ग्रो के 55.91 करोड़ शेयर हैं। यह कंपनी में उनकी 9.06% हिस्सेदारी है। और जब शेयर की कीमत रिकॉर्ड ₹169 प्रति शेयर पहुंची, उनके शेयरों की कुल कीमत लगभग ₹9,448 करोड़ हो गई। आइए मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के एक किसान के बेटे की सफलता की कहानी जानते हैं…

लेपा से IIT बॉम्बे तक

ललित केशरे का जन्म मध्य प्रदेश के लेपा गांव में हुआ। एक ऐसा गांव जहां इंग्लिश मीडियम स्कूल तक पहुंच नहीं थी। उनके माता-पिता ने उन्हें खरगोन में उनके दादा-दादी के पास रहने के लिए भेजने का मुश्किल फैसला किया ताकि वह जिले के इकलौते इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ सकें। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता अभी भी लेपा में रहते हैं और उसी जमीन पर खेती करते हैं।

केशरे की लाइफ में टर्निंग पॉइंट उस वक्त आया। जब उन्होंने लगभग इत्तेफाक से IIT एंट्रेंस एग्जाम के बारे में सुना। उन्होंने तैयारी की, JEE पास किया। उनके बाद उन्होंने IIT बॉम्बे में एडमिशन ले लिया। जहां उन्होंने बैचलर और मास्टर दोनों डिग्री हासिल की।

​​एक ऐसे गांव के इंसान के लिए जहां बहुत कम लोग जानते थे कि IIT क्या होता है, यह एक ऐसा बदलाव था जिसने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया।

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इंजीनियरिंग, एक फेल स्टार्टअप और फिर फ्लिपकार्ट

IIT के बाद, उनका करियर 2004 में बेंगलुरु में इट्टियम सिस्टम्स में शुरू हुआ, जहां उन्होंने लगभग 7 साल अपने प्रोडक्ट और इंजीनियरिंग की समझ को बेहतर बनाने में बिताए। लेकिन 2011 में, उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप में एक छलांग लगाई और एडुफ्लिक्स शुरू किया, जो एक एजुकेशन-फोकस्ड वेंचर था। यह दो साल तक चला; बिजनेस कभी भी वैसा नहीं बढ़ा जैसा उन्होंने उम्मीद की थी।

2013 में, वह उस समय फ्लिपकार्ट से जुड़े जब कंपनी तेजी से बढ़ रही थी। फ्लिपकार्ट के वर्षों ने उन्हें भारत के टेक इकोसिस्टम की संभावनाओं से परिचित कराया और उन्हें तीन भविष्य के को-फाउंडर: हर्ष जैन, ईशान बंसल और नीरज सिंह से भी मिलवाया।

ग्रो की शुरुआत

2016 में, चारों साथियों ने फ्लिपकार्ट छोड़ दिया और कुछ ऐसा बनाने का फैसला किया जिसके लिए उस समय उनमें से किसी के पास शब्द नहीं थे, आम भारतीयों के लिए एक मॉडर्न इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म। ग्रो के शुरुआती दिन साधारण थे। इस साल IPO सेरेमनी के दौरान भी, केशरे ने याद किया, “हमने सोचा था कि अगर हमें एक महीने में 100 कस्टमर मिल गए, तो यह बहुत अच्छा होगा। लेकिन हमें 600 मिले।”

वह शुरुआती ट्रैक्शन असल में मार्केटिंग से नहीं बल्कि प्रोडक्ट से आया था। एक साफ इंटरफेस, कोई मुश्किल शब्द नहीं, कोई डर नहीं, कंपनी ने म्यूचुअल फंड से शुरुआत की और जल्द ही स्टॉक, ETF, US इक्विटी और आखिर में डेरिवेटिव के लिए एक फुल-स्टैक प्लेटफॉर्म बन गई।

2025 के बीच तक, Groww के 12.6 मिलियन एक्टिव NSE क्लाइंट थे, जो भारत में किसी भी प्लेटफॉर्म के लिए रिटेल इन्वेस्टर्स का सबसे बड़ा बेस था।

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बड़ा ब्रेक

इन सालों में, Groww ने Peak XV Partners और Ribbit Capital से लेकर Y Combinator, Sequoia, ICONIQ और Tiger Global तक ग्लोबल इन्वेस्टर्स को अपनी ओर खींचा। 2021 में, यह एक यूनिकॉर्न बन गई। उसी साल बाद में, सत्या नडेला ने स्टार्टअप में पर्सनली इन्वेस्ट किया और एक एडवाइजर के तौर पर भी आए, जो किसी भारतीय कंपनी में उनका पहला पब्लिक पर्सनल इन्वेस्टमेंट था। TechCrunch के मुताबिक, FY25 में कंपनी ने 39 बिलियन रुपये का रेवेन्यू और 18 बिलियन रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया।

किसी भी फाउंडर ने शेयर नहीं बेचे। चारों ने अपनी हिस्सेदारी बनाए रखी, अकेले केशरे की 9.06% हिस्सेदारी ने उन्हें भारत के अरबपतियों के क्लब में मजबूती से जगह दिलाई।