IPO Scam Alert: बेंगलुरु में रहने वाले 77 वर्षीय के एक रिटायर्ड व्यक्ति के साथ शेयर बाजार में निवेश के नाम पर बड़ी ठगी हो गई। कुछ लोगों ने उन्हें ज्यादा मुनाफे का लालच दिया और धीरे-धीरे उनसे 67.10 लाख रुपये की रकम हड़प ली। शुरुआत में सब कुछ सही लग रहा था, लेकिन कुछ समय बाद ठगों ने उनसे और पैसे लगाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

इस दौरान बुजुर्ग व्यक्ति को शक हुआ और उन्होंने मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल चैटजीपीटी से सवाल किया। चैटजीपीटी जवाब में बताया कि ऐसे निवेश स्कीम अक्सर फर्जी होते हैं और यह एक स्कैम हो सकता है। एआई के सलाह पढ़कर उन्हें सारा मामला समझ आ गया। उन्होंने तुरंत और पैसे भेजना बंद कर दिया और सही कदम उठाया।

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क्या है मामला?

जनसत्ता की सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, 3 जनवरी को दर्ज FIR के मुताबिक, आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट के रिप्रेजेंटेटिव बनकर कुछ लोगों ने पिछले वर्ष नवंबर में बिन्नीपेट के रहने वाले पीड़ित से “बड़ी मात्रा में प्री-IPO अलॉटमेंट” दिलाने का वादा करके संपर्क किया। पुलिस ने कहा कि एक एग्रीमेंट पर साइन करने के लिए मनाने के बाद, उससे 5 लाख रुपये का शुरुआती डिपॉजिट करने के लिए कहा गया।

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शिकायत करने वाले को बाद में बताया गया कि उसे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के 150 शेयर अलॉट किए गए हैं, जिससे 80,000 रुपये का प्रॉफिट हुआ।

इससे उत्साहित होकर, पीड़ित को एक और इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए इन्वेस्ट करने के लिए कहा गया, इस बार उन्हें 23.10 लाख रुपये निवेश करने की बात की गई । हालांकि उन्होंने बात मान ली, लेकिन कहा जाता है कि उन्हें 45 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 2.24 लाख शेयर दिए गए, जो उनकी मांगी गई रकम से कहीं ज्यादा थे।

जनसत्ता की सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुलिस ने कहा कि जब उन्होंने ज्यादा अलॉटमेंट के पैसे देने में असमर्थता जताई, तो स्कैमर्स ने उन्हें ₹42 लाख चुकाने की शर्त पर 13 परसेंट इंटरेस्ट रेट पर ₹36.79 लाख का लोन ऑफर किया। पीड़ित इस अरेंजमेंट के लिए मान गए।

1 जनवरी को, उन्हें 2.24 लाख शेयर ₹125 प्रति शेयर के हिसाब से बेचने का निर्देश दिया गया, जिससे लगभग ₹2 करोड़ का पेपर प्रॉफिट दिखाया गया। हालांकि, जब उन्होंने रिक्वेस्ट की कि उन्हें ₹40 लाख दिए जाएं और लोन की रकम को कमाई से एडजस्ट किया जाए, तो रिक्वेस्ट मना कर दी गई।

बेंगलुरु के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (CCPS) में दर्ज FIR में कहा गया है, “इसी समय शिकायत करने वाले को चिंता हुई और उसने चैटजीपीटी में उनके बैकग्राउंड की जांच शुरू की। शिकायत करने वाले को यह जानकर झटका लगा कि यह एक धोखाधड़ी करने वाला संगठन था और इसके खिलाफ बहुत सारी शिकायतें थीं।”

पुलिस ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) एक्ट, 2000 के सेक्शन 66C (पहचान की चोरी के लिए सजा) और सेक्शन 66D (कंप्यूटर रिसोर्स का इस्तेमाल करके नकली पहचान बनाकर धोखाधड़ी) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सेक्शन 318(4) (धोखाधड़ी और बेईमानी से प्रॉपर्टी की डिलीवरी के लिए उकसाना) और 319(2) (किसी और के होने का नाटक करके धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने कहा कि अभी आगे की जांच चल रही है।

[डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से निवेश सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। Jansatta.com अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।]