उन्होंने बताया कि कोरोना टीके के लिए भी सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिससे देश में सभी लोगों तक कोरोना का टीका पहुंचाया जा सकेगा। वहीं, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पूर्व अध्यक्ष केके अग्रवाल ने भी इस बजट को बेहतर करार दिया है।
मिश्रा ने कहा कि यह बजट सिर्फ ‘अच्छा’ ही नहीं बल्कि ‘बहुत अच्छा’ है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक पेशे से जुड़े सभी लोग स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी की लगातार मांग करते रहे हैं।
अब बेशक कोरोना महामारी की वजह से ही सही, लेकिन सरकार ने इसमें वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि पिछले साल के मुताबिक स्वास्थ्य बजट में 137 फीसद की बढ़ोतरी हुई है जो बेहद अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बीच चर्चा हो रही थी कि कोरोना टीके के पैसे कौन देगा? इसका जवाब अब सामने है और सरकार ने कोरोना टीकाकरण के लिए 35,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे देश में सभी लोगों तक कोरोना का टीका पहुंचाया जा सकेगा।
मिश्रा ने कहा कि यह अच्छी बात है कि सरकार को ध्यान अब स्वास्थ्य पर अधिक है। इस बजट में गांवों और शहरों दोनों जगहों पर रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की चिंता की गई है। इसमें रोगों की रोकथाम से लेकर उनके इलाज की बात की गई है। स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर सरकार ने अधिक ध्यान दिया है। उन्होंने बताया कि बजट में देशभर में न्यूमोकोकल टीकों को उपलब्ध कराने का प्रावधान भी किया गया है जिससे हर साल 50,000 से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। मिश्रा ने कहा कि बजट तो मिल गया है कि अब इसका उपयोग भी बेहतर तरीके से होना चाहिए तभी जमीनी स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।
केके अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य को महत्त्व देते हुए बजट में काफी बढ़ोतरी की है जो अच्छी बात है। कोरोना महामारी के टीके के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया है। अग्रवाल ने कहा कि अब इन्हें शोध पर ध्यान देना चाहिए। ताकि टीकों और दवाइयों के शोध पर अधिक काम किया जा सके। इससे भविष्य में आने वाली महामारियों से भी बेहतर तरीके से लड़ा जा सकेगा। अग्रवाल ने कहा कि 35 हजार करोड़ से गरीब लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा सकेगा। इसके अलावा अन्य लोग अपने खर्च पर टीका लगवा सकेंगे।
