Budget 2026 Expectations : Insurance Sector : देश का इंश्योरेंस सेक्टर बड़ी उम्मीदों के साथ बजट 2026 का इंतजार कर रहा है। लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को उम्मीद है कि इस बार का बजट सिर्फ टैक्स राहत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिटायरमेंट प्लानिंग, हेल्थ कवरेज और सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। सेक्टर की प्रमुख मांगों में इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट की लिमिट बढ़ाना, एन्युइटी प्रोडक्ट्स के टैक्स ट्रीटमेंट में सुधार और रूरल व सोशल सिक्योरिटी से जुड़ी बीमा योजनाओं को सस्ता बनाना शामिल है।

इंश्योरेंस सेक्टर को क्यों है बजट से बड़ी उम्मीद

भारत में इंश्योरेंस सेक्टर की ग्रोथ पिछले कुछ सालों से स्टेबल रही है, लेकिन अब भी इंश्योरेंस की पहुंच और कवरेज में बड़ा गैप मौजूद है। खासकर रिटायरमेंट प्लानिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा की पहुंच काफी कम है। हाल ही में इंश्योरेंस प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने जैसे कदमों ने सेक्टर को मजबूती दी है। अब इंडस्ट्री चाहती है कि बजट 2026 इस मोमेंटम को आगे बढ़ाए।

बजाज लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ तरुण चुघ का कहना है कि बजट के जरिए लाइफ इंश्योरेंस को लॉन्ग टर्म सेविंग और रिटायरमेंट सॉल्यूशन के रूप में और मजबूत किया जा सकता है। उनके मुताबिक, हाल के पॉलिसी फैसलों ने एक मजबूत आधार तैयार किया है, जिस पर अब नतीजों पर फोकस करने वाले उपाय किए जाने चाहिए।

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एन्युइटी पर टैक्स ट्रीटमेंट में बदलाव की मांग

इंश्योरेंस सेक्टर की एक अहम मांग एन्युइटी प्रोडक्ट्स के टैक्स ट्रीटमेंट से जुड़ी है। फिलहाल, एन्युइटी से मिलने वाली पूरी रकम पर टैक्स का बोझ रिटायरमेंट प्लानिंग को कम आकर्षक बनाता है। तरुण चुघ का कहना है कि अगर एन्युइटी पेआउट पर सिर्फ रिटर्न वाले हिस्से को टैक्सेबल बनाया जाए और अन्य पेंशन प्रोडक्ट्स के बराबर टैक्स छूट दी जाए, तो लोग अपनी जरूरत के हिसाब से रिटायरमेंट प्रोडक्ट चुन सकेंगे।

उनका कहना है कि एन्युइटी और अन्य पेंशन इंस्ट्रूमेंट्स के बीच टैक्स में पैरिटी यानी समानता लाने से लॉन्ग टर्म सेविंग को बढ़ावा मिलेगा और रिटायरमेंट सिक्योरिटी मजबूत होगी।

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ट्रेडिशनल पॉलिसी और ULIP में पैरिटी जरूरी

इंडस्ट्री का मानना है कि ट्रेडिशनल और यूनिट लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी (ULIP) से जुड़े टैक्स के नियमों में समानता लाने से टैक्स सिस्टम आसान होगा। इससे निवेशकों में लंबे समय तक अनुशासित ढंग से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और बीमा सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वेल्थ क्रिएशन का भी मजबूत जरिया बनेगा।

तरुण चुघ के अनुसार, एक समान और तर्कसंगत टैक्स फ्रेमवर्क लाइफ इंश्योरेंस को ज्यादा भरोसेमंद लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल टूल बना सकता है।

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हेल्थ इंश्योरेंस पर 80D की लिमिट बढ़ाने की मांग

हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर भी बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इफ्को-टोकियो (IFFCO-TOKIO) जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ सुब्रत मंडल का कहना है कि हाल में हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी रेशनलाइजेशन से पॉलिसीधारकों को राहत मिली है और इससे बीमा को और किफायती बनाने में मदद मिलेगी।

हालांकि, उनका मानना है कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80D के तहत मिलने वाली छूट मौजूदा मेडिकल महंगाई के हिसाब से नाकाफी हो चुकी है। अभी 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यह लिमिट 25,000 रुपये और सीनियर सिटीजन के लिए 50,000 रुपये है। मंडल का कहना है कि अगर इस लिमिट को दोगुना कर दिया जाए, तो लोग सिर्फ मिनिमम कवरेज की जगह अपनी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लेने के लिए प्रेरित होंगे।

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फसल और क्लाइमेट रिस्क इंश्योरेंस पर फोकस

बजट 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को कृषि और क्लाइमेट रिस्क इंश्योरेंस यानी जलवायु जोखिम बीमा को मजबूत करने की भी उम्मीद है। सुब्रत मंडल का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए ज्यादा आवंटन के साथ ही बाढ़, हीटवेव और साइक्लोन जैसे क्लाइमेट रिस्क को कवर करने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, डिजास्टर और कैटास्ट्रॉफी इंश्योरेंस पूल को बढ़ावा देने से बड़ी आपदाओं के समय क्लेम सेटलमेंट की क्षमता मजबूत होगी।

80C की मौजूदा लिमिट बढ़ाना जरूरी

इनकम टैक्स की ओल्ड रेजीम में लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर फिलहाल सेक्शन 80C के तहत सालाना सिर्फ 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर छूट मिलती है। इस लिमिट में कई अन्य सेविंग स्कीम्स भी शामिल हैं। ऐसे में इंश्योरेंस सेक्टर चाहता है कि या तो इस सीमा को बढ़ाया जाए या इंश्योरेंस में निवेश पर अलग से अतिरिक्त टैक्स बेनिफिट मिले, ताकि लोग सुरक्षा और सेविंग दोनों पर ध्यान दे सकें।