Budget 2026 Expectations : देश में घर खरीदने का सपना आज भी करोड़ों लोगों के लिए सबसे बड़ा सपना है. लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर की मौजूदा तस्वीर थोड़ी उलझी हुई नजर आती है. साल 2025 में जहां एक तरफ महंगे और लग्ज़री घरों की बिक्री तेजी से बढ़ी, वहीं आम आदमी के लिए बने अफोर्डेबल घरों की बिक्री पर दबाव नजर आया. ऐसे में रियल एस्टेट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि केंद्र सरकार के बजट 2026 में अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग पर खास जोर दिया जाएगा.

लग्जरी हाउसिंग में तेजी, अफोर्डेबल सेगमेंट पीछे

एनॉरॉक (ANAROCK Group) के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि भारत की हाउसिंग स्टोरी ऊपर से मजबूत दिखती है, लेकिन अंदर ही अंदर असंतुलन बढ़ रहा है. उनका कहना है कि “साल 2025 में नए घरों की बिक्री संख्या 14 फीसदी घटी, लेकिन उनका कुल बिक्री मूल्य 6 फीसदी बढ़कर करीब 6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसका साफ मतलब है कि महंगे और लग्ज़री घरों की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि अफोर्डेबल हाउसिंग पर दबाव है.”

इन आंकड़ों से यह संकेत भी मिलता है कि आम मिडिल क्लास और लोअर इनकम ग्रुप के लिए घर खरीदना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है.

अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और टैक्स राहत पर जोर

अनुज पुरी का मानना है कि बजट 2026 में शहरों से जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है. इससे रियल एस्टेट डेवलपमेंट को सीधा फायदा मिलेगा.

उन्होंने सरकार से सेक्शन 80-IBA के तहत मिलने वाले 100 फीसदी टैक्स हॉलिडे को दोबारा लागू करने की मांग भी की. उनके अनुसार, “इस टैक्स इंसेंटिव ने पहले अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ाने और डेवलपर्स को इस सेगमेंट में आने के लिए प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई थी.”

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अफोर्डेबल हाउसिंग की लिमिट बदलना जरूरी

बढ़ती जमीन और निर्माण लागत के बीच अफोर्डेबल हाउसिंग की मौजूदा परिभाषा भी सवालों के घेरे में है. अनुज पुरी कहते हैं,“अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए 45 लाख रुपये की प्राइस लिमिट बाजार की मौजूदा हकीकत को नहीं दर्शाती. मुंबई जैसे शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग की सीमा कम से कम 95 लाख रुपये और दूसरे बड़े शहरों में 75 लाख रुपये होनी चाहिए, भले ही घर के साइज से जुड़े नियम पहले जैसे बने रहें.”

हाउसिंग फॉर ऑल के लिए रेंटल हाउसिंग

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल यानी NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी का जोर रेंटल हाउसिंग पर है. उनका कहना है कि किराये के घरों को ‘सबके लिए आवास’ (Housing for All) के विज़न का अहम हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा,“हम चाहते हैं कि अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए टैक्स बेनिफिट की अवधि कम से कम पांच साल तक बढ़ाई जाए और सेक्शन 80 IBA(6)(da) में मौजूदा कड़े नियमों को हटाया जाए.”

साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निर्माण पूरा होने के बाद पांच साल तक स्टॉक-इन-ट्रेड के तौर पर रखी गई प्रॉपर्टी से मिलने वाले किराये को टैक्स से मुक्त किया जाए, ताकि लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिले.

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स्टांप ड्यूटी और टैक्स नियमों में हो सुधार

निरंजन हीरानंदानी ने मौजूदा स्टांप ड्यूटी सिस्टम पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि सर्किल रेट या रेडी रेकनर रेट के आधार पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी कई बार खरीदने और बेचने वालों पर एक्स्ट्रा बोझ डाल देती है. उन्होंने यह भी कहा कि हाउसिंग इनकम में होने वाले नुकसान को दूसरी इनकम से एडजस्ट करने की इजाजत न मिलने से रेंटल हाउसिंग में इनवेस्टमेंट कम होता है.

अफोर्डेबिलिटी और कंजम्पशन को बढ़ावा

CBRE में साउथ ईस्ट एशिया, मिडल ईस्ट और अफ्रीका के चेयरमैन और CEO अंशुमान मैगज़ीन का मानना है कि बजट 2026 में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी के साथ-साथ कंजम्प्शन बढ़ाने पर भी जोर देना चाहिए. उनके अनुसार,“रेंटल हाउसिंग पॉलिसी को मजबूत करके अर्बन रीडेवलपमेंट के लिए लॉन्ग टर्म फ्रेमवर्क मुहैया कराया जाए, तो घनी आबादी वाले शहरों में सप्लाई की कमी को दूर किया जा सकता है.”

उन्होंने सिंगल-विंडो क्लियरेंस के जरिए मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने, ग्रीन और सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन के लिए इंसेंटिव देने पर भी जोर दिया. उनका मानना है कि भारत को एक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के तौर पर देखने वाले मल्टीनेशल कॉरपोरेशन्स की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में सरकार को भी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसे सेक्टर्स में स्किल डेवलपमेंट पर और फोकस करना चाहिए.” 

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मिडिल क्लास की परचेजिंग पावर बढ़नी चाहिए

लोहिया वर्ल्डस्पेस (Lohia Worldspace) के डायरेक्टर पीयूष लोहिया का कहना है कि मिडिल क्लास की परचेजिंग पावर को बढ़ाना और पॉलिसी में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है. उनका मानना है कि “पर्सनल इनकम टैक्स में लगातार रैशनलाइजेशन से मिडिल क्लास पर बोझ कम होगा और उनकी खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी.”

उन्होंने यह भी कहा कि अर्बन डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक्स और हाउसिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित कैपेक्स से रोजगार और निवेश दोनों को रफ्तार मिलेगी. इसके साथ ही MSME सेक्टर के लिए आसान कर्ज, GST को आसान बनाने और ग्रीन कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी एवं वाटर कंजर्वेशन के लिए इंसेंटिव भी जरूरी है. 

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बजट 2026 से बदलेगी तस्वीर?

इंडस्ट्री लीडर्स का मानना है कि अगर बजट 2026 में अफोर्डेबल और रेंटल हाउसिंग से जुड़े मुद्दों को संतुलित तरीके से संबोधित किया गया, तो रियल एस्टेट सेक्टर में फिर से बड़े पैमाने पर स्टेबल ग्रोथ देखने को मिल सकती है.