कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें विरासत में अकूत संपत्ति मिलती है। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर किया और पूरी दुनिया में कामयाबी का परचम लहराया। ऐसे ही चुनिंदा लोगों में देश के दिग्गज उद्योगपतियों में शामिल वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल भी हैं। साल 2025 के आखिर तक सब कुछ बढ़िया चल रहा था और उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स क्रिसमस और न्यू ईयर सेलिब्रेशन की पोस्ट से भरे थे। लेकिन साल 2026 की शुरुआत में ही वेदांता के चेयरमैन व परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
49 साल के अग्निवेश अग्रवाल यूएस में स्कीइंग करते समय घायल हो गए थे। और पिछले कुछ दिनों से न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया। खुद अनिल अग्रवाल ने इस दुखभरी खबर को साझा किया है और इसके बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। इसके साथ ही बहुत सारे लोगों के मन में अनिल अग्रवाल, उनके परिवार, विरासत, नेटवर्थ से जुड़े सवाल भी हैं।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन, 75 प्रतिशत संपत्ति करेंगे दान
आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर अनिल अग्रवाल हैं कौन और उनके परिवार में कौन-कौन हैं। आखिर कैसे बिहार के पटना शहर से आए इस शख्स ने आज दुनियाभर में फैले हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर दिया। अब उनके बेटे अग्निवेश के असमय जाने के बाद वेदांता ग्रुप की जिम्मेदारी आखिर कौन संभालेगा?
अनिल अग्रवाल कौन हैं?
अनिल अग्रवाल देश के दिग्गज कारोबारी ग्रुप Vedanta Resources के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उन्होंने साल 1970 के दशक में मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग से शुरुआत की थी। फिर 1976 में उन्होंने वेदांता लिमिटेड की स्थापना की जो पहले स्क्रैप मेटल के कारोबार तक सीमित थी। कई बार असफल होने पर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वेदांता को मेटल, माइनिंग, पावर और ऑयल जैसे सेक्टर में लीडिंग कंपनी बनाया। अपनी लगन, दूरदर्शिता और सही फैसलों के दम पर अनिल अग्रवाल ने वेदांता ने तेजी से विस्तार किया और उन्हें मेटल इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई। इसी वजह से उन्हें ‘मेटल किंग’ भी कहा जाने लगा।
अनिल अग्रवाल का जन्म 24 जनवरी 1954 को बिहार के पटना में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। उन्होंने पटना के मिलर स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की।
अनिल अग्रवाल के परिवार में कौन-कौन हैं?
अनिल अग्रवाल का परिवार हमेशा से लाइमलाइट से दूर रहने के लिए जाना जाता रहा है। सादगी इस परिवार की पहचान रही है। उनकी पत्नी किरण अग्रवाल परिवार को संभाले हुई हैं लेकिन चकाचौंध की दुनिया से दूर रहती हैं। उनके दो बच्चे थे। बेटा अग्निवेश अग्रवाल और बेटी प्रिया अग्रवाल। बेटे अग्निवेश ने हाल ही में अब दुनिया को अलविदा कह दिया है जिसके बाद परिवार को बड़ा झटका लगा है। बेटे की अचानक मौत के बाद अग्निवेश के बारे में बताते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि वह सिर्फ एक बेटा नहीं बल्कि उनका सबसे करीबी दोस्त और गर्व था।
बिजनेस दुनिया में थी अग्निवेश अग्रवाल की अलग पहचान
अग्निवेश अग्रवाल बिजनेस में काफी एक्टिव थे और उन्होंने बिजनेस की दुनिया में अपनी एक बड़ी पहचान बनाई थी। वह Hindustan Zinc के चेयरमैन रहे। उन्होंने ‘Fujairah Gold’ गोल्ड कंपनी की स्थापना की। वह वेदांता ग्रुप की कंपनी Talwandi Sabo Power Limited के बोर्ड मेंबर भी थे।
अब कौन संभालेगा वेदांता की जिम्मेदारी?
लोगों के मन में सवाल है कि बेटे अग्निवेश के जाने के बाद अब वेदांता ग्रुप की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? माना जा रहा है कि उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल पहले से कंपनी में एक्टिव हैं और उनकी बिजनेस में उनकी पकड़ अच्छी है। इसलिए आने वाले दिनों में वेदांता की कमान प्रिया संभाल सकती हैं। अभी मौजूदा समय में प्रिया वेदांता और हिंदुस्तान ज़िक की बोर्ड मेंबर भी हैं। वह Hindustan Zinc की चेयरपर्सन भी हैं।
अनिल अग्रवाल की कुल संपत्ति कितनी है?
बिहार के पटना से आए अनिल अग्रवाल की गिनती आज देश के सबसे बड़े कारोबारियों और रईसों में होती है। एक कबाड़ व्यापारी के तौर पर अपना सफर शुरू करने वाले वेदांता के चेयरमैन और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 4.2 अरब डॉलर यानी लगभग 35,000 करोड़ रुपये है।
गौर करने वाली बात है कि साल 2003 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने वाली वेदांता पहली भारती कंपनी बनी। 2019 में अनिल अग्रवाल ने कंपनी को फिर से प्राइवेट कर दिया। वेदांता ग्रुप का कारोबार आज दुनियाभर में फैला है और यह माइनिंग, मेटल व पावर व ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टर में कारोबार करती है।
75 प्रतिशत संपत्ति दान करेंगे अनिल अग्रवाल
आपको बता दें कि अनिल अग्रवाल को अपने दान और सादगी के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी 75 प्रतिशत संपत्ति को समाज सेवा के लिए दान करने का फैसला किया है। अनिल अग्रवाल ने बेटे के निधन के बाद एक बार फिर इस वादे को दोहराया है। बेटे के निधन के बाद उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब वह और भी सादगी से जीवन बिताएंगे।
वेदांता के चेयरमैन ने बताया कि अग्निवेश का सपना था- देश में कोई बच्चा भूखा न सोए और हर युवा को काम मिले, इसी संकल्प को लेकर अब अग्रवाल परिवार आगे बढ़ने जा रहा है।
