Adani Group: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर अडानी ग्रुप के खिलाफ किसानों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। सेब की फसल के कम दाम देने को लेकर संयुक्त किसान मंच ने अडानी ग्रुप पर आरोप लगाया है कि एक्स्ट्रा एक्स्ट्रा स्मॉल (EES) सेबों के लिए कंपनी की ओर से दाम घटाकर 60 से 58 कर दिया गया है।
ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त किसान मंच के सह-संयोजक संजय चौहान ने कहा कि सरकार ने निजी कंपनियों की खरीद कीमतों पर बातचीत करने के लिए एक समिति बनाई है, लेकिन अडानी ग्रुप के सभी स्टोर्स सरकार द्वारा नियुक्त समिति के अधिकारों को चुनौती देते हुए एकतरफा कीमतें तय कर रहा है।
बता दें, अडानी स्टोर्स ने समिति की बैठक होने से पहले ही सेबों की फसल खरीद के लिए शुरूआती कीमतों का ऐलान कर दिया था और समिति की ओर से 25 अगस्त को एक नोटिस भी जारी किया गया था।
वहीं, आगे चौहान ने कहा कि कुछ दिनों पहले समिति में सेब खरीद की कीमत तय करने के लिए बातचीत शुरू होने से पहले ही अडानी शुरूआती कीमतों का ऐलान कर दिया था, जिसे लेकर समिति ने अडानी ग्रुप के रवैये की आलोचना की थी। इसके बाद अब वह समिति से बिना कोई सलाह लिए अपने-आप कीमतों को घटा रहे हैं। यह सीधे तौर पर सरकार को चुनौती देना है।
हिमाचल की कुल जीडीपी का 13.5 फीसदी हिस्सा सेब की खेती से आता है। किसानों को डर यह है कि अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड का ऐलान स्थानीय बाजार में फलों की कीमत पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। अडानी एग्री फ्रेश हिमाचल में सेब की सबसे बड़ी खरीदार है। कंपनी के पास पूरे राज्य में तीन कोल्ड स्टोरेज फैसिलिटी है।
पिछले साल हिमाचल में 5,500 करोड़ सेब का व्यापार हुआ था, जो फ्री मार्किट मॉडल पर चलता है। पिछले साल अडानी ग्रुप ने ए- ग्रेड के सेब के लिए 72 रुपए प्रति किलो का भाव का ऐलान किया था, जो 2020 में किए गए 88 रुपए प्रतिकिलो के दिए गए भाव के काफी कम था।
