शाहनवाज हुसैन का जन्म 12 दिसंबर, 1968 को बिहार के सुपौल में हुआ। भारतीय जनता युवा मोर्चा के साथ सियासी पारी की शुरुआत की। भाजपा के टिकट पर दो बार भागलपुर से सांसद रह चुके हैं। 1999 में लोकसभा सदस्य बनने के बाद खाद्य और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री बनाए गए। बीते लोकसभा चुनाव में राजग गठबंधन में यह सीट जद एकी के पास जाने के कारण वे चुनाव लड़ने से वंचित रह गए। भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में चुनावी सभाओं और अन्य मंचों पर पार्टी के पक्ष को बेहतर तरीके से रखते हैं। भाजपा के सौम्य और उदार चेहरों में गिने जाते हैं।

मनोज मिश्र : अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर के हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। आपको क्या लगता है कि कब तक सामान्य होंगे?
शाहनवाज हुसैन : अनुच्छेद 370 हटने से पहले भी हालात बहुत सामान्य नहीं थे। वहां की घाटी को मैंने बहुत नजदीक से देखा है। इसलिए कश्मीर पहली बार 370 के बाद बंद नहीं है। 370 को हमने एकदम से नहीं हटाया। हमारा जो मकसद था 370 को हटाने का उसमें कई बार बदलाव हुए भी हैं। यह जरूर है कि प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी ने बहुत साहस का परिचय दिया है। पहले यह था कि 35 ए को पहले हटाएंगे, मगर जब कश्मीर को टेबल पर रखा, तो जितनी सर्जरी हो सकती थी, सब एक साथ कर दिया। यानी अब अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं है। कई लोग कहते हैं कि विश्वास में लेकर करना था, पर यह ऐसा रोग था, जिसका इलाज विश्वास में लेकर करना संभव नहीं था। जब भी इसमें विश्वास हासिल करने की कोशिश की गई, इसमें कोई मदद नहीं मिली। तो, 370 का हटना कश्मीरियों के हित में है। यह बहुत ईमानदाराना कोशिश है। हर कश्मीरी आतंकी नहीं है और न हर आतंकी कश्मीरी है। हमारी कोशिश है कि कैसे कश्मीरियों का दिल जीतें। भाजपा की आधिकारिक लाइन है कि हमें कश्मीरियों का दिल जीतना है।

मुकेश भारद्वाज : मगर कहा जाता है कि वाजपेयी जी ने जो कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत का फार्मूला दिया था, वह इस फैसले के बाद जैसे खत्म हो गया है। इसमें आक्रामकता अधिक है। जिस तरह इंटरनेट, फोन वगैरह पर रोक लगी है और सूचनाएं नहीं आ पा रही हैं, वैसा पहले कभी नहीं होता था।
’आक्रामकता कई बार दिखी है। सरकार के खिलाफ भी दिखती रही है। हां, सरकार यह मानती है कि राष्ट्रीय हित में टेलीफोन लाइनों का खुलना जरूरी है। जहां जरूरी है, वहां खुली भी हैं। मगर हम किसी को इस बात की इजाजत नहीं देंगे कि वह कश्मीर को हिंसा के रास्ते पर ले जाए। यह जरूर है कि कुछ खबरें भ्रामक आई हैं और कुछ सही भी आई हैं, मगर कश्मीरियों का दिल जीतना है, यह सरकार का मकसद है। जहां तक वाजपेयी जी के कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत की बात है, हम उनके रास्ते पर ही चल रहे हैं।

दीपक रस्तोगी : पहले जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर की बात होती थी, तो पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की बात होती थी। अब 370 के बाद देखा जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद का मुद्दा कहीं पीछे छूट गया है और कश्मीर का मुद्दा हावी होता जा रहा है। इसमें कहीं हमारी तरफ से कोई कमी तो नहीं रह गई है?
’इसमें दो बातें हैं। कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद है, फिर पूरी दुनिया में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद है। कोई भी घटना देख लीजिए, पाकिस्तानी का हाथ मिलेगा। इस तरह पूरी दुनिया में वे आतंकवाद के प्रतीक बन गए हैं। इसमें हमने उनके चेहरे से नकाब उठाया है। जहां तक यहां की बात है, हम पाकिस्तान के आतंकवाद का जवाब देने में सक्षम हैं। जबसे पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश बना, तबसे उसकी एक हेकड़ी हो गई थी। जब भी वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलते थे, तो बराबरी-सी हो गई थी। वे हर बात पर कहते थे कि हम परमाणु शक्ति देश हैं। पर अब उसकी हेकड़ी मोदी जी ने तोड़ दी है। हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया परमाणु शक्ति देश होते हुए, हमने बालाकोट किया परमाणु शक्ति देश होते हुए। अब मैं मानता हूं कि उनकी बराबरी हमने खत्म कर दी है। आतंकवाद चर्चा में रहेगा ही, पर पाकिस्तान का एजंडा है कि वह कश्मीर पर चर्चा कराए। मगर हमारा जवाब बहुत साफ है। अब हमारा मकसद पाकिस्तान के हिस्से वाला कश्मीर है। इसमें हमें किसी की मदद की जरूरत भी नहीं है। अब हम मजबूत मुल्क हैं।

अजय पांडेय : अगर हम मजबूत मुल्क हैं, तो आज रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया से इतना रिजर्व क्यों लेना पड़ रहा है?
’देखिए, लाभांश तो पहले भी आता था। सरकार को रिजर्व बैंक से लाभांश आता ही है। हमने एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रुपए बैंक से लेकर बैंकों की मजबूती के लिए लगाने का सोचा। वह पैसा अर्थव्यवस्था को चलाने में रिजर्व बैंक की मदद है। वह पैसा कहीं भी इधर-उधर नहीं किया गया है। पहले लोग धोखाधड़ी करके कर्ज लेते थे और भाग जाते थे, पर अब कर्ज लेना आसान नहीं रह गया है। जितने कर्ज साठ सालों में नहीं दिए गए, उससे ज्यादा कर्ज यूपीए के दस सालों में दे दिए गए। उसके आखिरी पांच साल तो एक तरह से बैंकों पर डाका था। इसलिए बैंकों की हालत खराब होती गई। अभी जो प्रयास हो रहे हैं, वे बैंकों की बेहतरी के लिए हो रहे हैं।

मृणाल वल्लरी : अभी हालत यह है कि सीसीडी के संस्थापक को खुदकुशी करनी पड़ रही है। जीडीपी पांच फीसद है। कंपनियां विज्ञापन देकर बता रही हैं कि उनकी हालत ठीक नहीं है। मजबूत राजनीतिक फैसलों के बरक्स इस कमजोर आर्थिक नजारे को आप कैसे देखते हैं?
’बहुत दुखद है कॉफी कैफे डे के मालिक का खुदकुशी करना। तनाव की वजह बहुत से लोगों की बहुत-सी है। ऐसा नहीं है कि अगर किसी परेशानी से एक व्यक्ति ने ऐसा कदम उठाया, तो वैसी परेशानियां दूसरों की नहीं है। उससे ज्यादा परेशानियां भी कई लोगों को हैं, पर वे संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खुदकुशी करने से हम पर भी निशाना साधा गया। मगर मैं मानता हूं कि अर्थव्यवस्था की जो हालत है, वह तो आंकड़ों में है। यह सही है कि जीडीपी की दर थोड़ी कम हुई है। पर इसे ठीक करने की इच्छाशक्ति हममें है। जो कमियां हैं, उन्हें दूर करेंगे। विश्व स्तर पर अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत खराब है। उसकी तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है। अमेरिका और चीन के व्यापार युद्ध का भी असर हम पर दिख रहा है। इसको ठीक करेंगे, यह आत्मविश्वास है। इसमें रियल एस्टेट और टेक्सटाइल के क्षेत्र में भी बेहतरी के प्रयास किए जा रहे हैं।

पंकज रोहिला : नोटबंदी के बाद जीडीपी में यह सबसे बड़ी गिरावट है। इसमें दो पक्ष कौन-से हैं, जिसकी वजह से यह स्थिति आई?
’देखिए, नोटबंदी वजह नहीं हो सकती। नोटबंदी अर्थव्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए की गई थी। अब सारा धन किसी न किसी तरह चल कर बैंकों के जरिए आया है। अब कुछ लोग मिलते हैं, जो कहते हैं कि जीएसटी लगने से हमारे लिए बहुत बढ़िया हो गया, बीच में कोई टैक्स नहीं देना पड़ता। दरअसल, इसकी वजह विश्व की अर्थव्यवस्था है। इस स्थिति से उबरने के लिए सरकार ने कुछ उपाय किए हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह स्थिति थोड़े समय की है।

सूर्यनाथ सिंह : रोजगार के नए अवसर पैदा करने के मोर्चे पर सरकार कैसे कमजोर साबित हुई?
’यह सही नहीं है कि रोजगार के नए अवसर नहीं बने हैं। यह सही है कि कुछ क्षेत्रों में रोजगार गए हैं, पर कुछ क्षेत्रों में आए भी हैं। आनलाइन बाजार में बढ़त हुई है। मगर मोटर वाहन क्षेत्र या टेक्सटाइल क्षेत्र में थोड़े रोजगार गए हैं। लेकिन मोटर वाहन क्षेत्र में लोगों ने नए मॉडल के वाहनों का इंतजार करना शुरू किया, इसलिए यह स्थिति आई। फिर लोगों की क्रय शक्ति भी कुछ घटी है। रोजगार का क्षेत्र हमारे लिए चुनौतीपूर्ण है और हमारा उस पर काम चल रहा है। मुद्रा लोन के जरिए हमने नौजवानों को स्वरोजगार पर जोर दिया है। रोजगार के मामले में कहीं कोई कमी है, तो उसे दूर किया जा रहा है।

आर्येंद्र उपाध्याय : नोटबंदी के बाद कहा गया था कि कैशलेस का चलन बढ़ेगा, पर अब नकदी का चलन फिर से बढ़ गया है। तो फिर सरकार का मकसद कहां तक पूरा हुआ?
’हमारा जोर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर ज्यादा था। मगर कई जगह अब भी नकदी का चलन है। उसको कैसे कम से कम किया जाए, इसकी कोशिश जारी है।

मृणाल वल्लरी : सरकार में यह भावना क्यों है कि हमारी जेब में जो नकदी है, वह साफ नहीं है। किसी भी देश में पचास फीसद से ऊपर डिजिटल पेमेंट नहीं है। हमारे यहां इस पर इतना जोर क्यों है?
’आपने देखा होगा कि कल ही सीबीआइ ने डेढ़ सौ ठिकानों पर छापे मारे। मोदी जी भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टालरेंस रख रहे हैं। यह जो कोशिश हो रही है, उसमें कुछ कठिनाइयां दिख रही हैं। लोगों में थोड़ी जागरूकता की कमी है। इसमें सरकार को भी प्रयास करना चाहिए। जब सड़क चौड़ी करते हैं, तो उसमें कुछ मकान-दुकान भी टूटते हैं।

मनोज मिश्र : बड़े उत्साह के साथ भाजपा और जद (एकी) साथ आए थे, पर थोड़े दिनों बाद ही कड़वाहट की खबरें आने लगी। क्या अगला चुनाव आप लोग साथ लड़ेंगे?
’जब हमने जद यू से समझौता किया था तो उसके अध्यक्ष जार्ज फर्नांडीज थे। फिर शरद यादव हुए। फिर नीतीश जी की हमारे सहयोग से सरकार बनी। हालांकि, बीच में वे हमसे अलग भी हुए। फिर हमसे जुड़ गए हैं। तो ठीक है। जैसा कि हमारे कुछ विरोधी दुष्प्रचार कर रहे हैं, हमारे रिश्ते खराब भी नहीं हैं।

दीपक रस्तोगी : पर तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर नीतीश जी का व्यवहार विपक्ष की तरह क्यों देखा गया?
’हम और जद यू दो दल हैं। हमारा गठबंधन हुआ, इसका मतलब यह नहीं कि हर मामले में वे हमारा साथ दें। कई मुद्दों पर उनकी राय हमसे अलग हो सकती है। पर एक बड़े एजंडे पर बिहार में हम साथ हैं।

सूर्यनाथ सिंह : अब ऐसा माहौल बन गया है जैसे भाजपा मुसलिम विद्वेषी है। आपके क्या अनुभव रहे हैं? क्या मुसलमानों में इसे लेकर कोई भय है?
’यह बात मैं शुरू से कहता रहा हूं, और बीस साल पहले संसद में भी कहा था कि भारत से अच्छा देश कोई नहीं हो सकता और मुसलमानों के लिए इससे अच्छा कोई देश नहीं हो सकता। हिंदुस्तान में मुसलिम जितने खुशहाल हैं, उतने पाकिस्तान में नहीं हैं। दो-चार घटनाएं तो हर जगह होती हैं। कहीं बच्चा चोरी के नाम पर, तो कहीं डायन के नाम पर या गोकशी के नाम पर या छेड़खानी के नाम पर। यह नहीं होना चाहिए। पर मुसलमानों के लिए अगर कहीं जन्नत है, तो वह हिंदुस्तान है। यहां मस्जिदों में बम नहीं फटते। यहां अब वह दौर बदल गया। दौर इसलिए बदल गया कि यहां का बहुसंख्यक समाज बहुत अच्छा है। जो मुसलमान यहां रह गए, पाकिस्तान नहीं गए, वे इसलिए रह गए, क्योंकि हिंदू भाइयों ने उनकी रक्षा की। मेरा मानना है कि हिंदुस्तान में ऐसा खराब माहौल नहीं है। कहीं कोई दंगा नहीं। हिंदुस्तान में जितना डराया जा रहा है, उतना डर नहीं है। जो डरे हुए हैं, वही हिंदुस्तान के मुसलिम को डरा रहे हैं। अब मैं कहता हूं- मुसलमान के लिए भारत से अच्छा देश, हिंदू से अच्छा दोस्त, मोदी से अच्छा नेता नहीं मिल सकता।

आर्येंद्र उपाध्याय : भाजपा में कुछ नेता ऐसे हैं, जो बेतुके बयान देते हैं, जिससे पार्टी को किरकिरी झेलनी पड़ती है। इस पर आप क्या कहते हैं।
’कुछ लोगों के बयान जरूर निंदनीय हैं। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी उस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने सख्ती से उन्हें चेतावनी दी है। कश्मीरियों को लेकर हमारा सख्त रवैया है कि यह उन्हें गले लगाने का वक्त है, उनके खिलाफ कोई भी बयान स्वीकार्य नहीं है।

मृणाल वल्लरी : चाहे तीन तलाक हो, अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हो या फिर प्रधानमंत्री का जनसंख्या नियंत्रण पर बयान हो, भाजपा के ही कुछ नेता इसे मुसलमान विरोधी बता कर भुनाते हैं। यह प्रवृत्ति क्यों?
’कुछ नादान लोग हैं। भाजपा के अध्यक्ष, संसदीय बोर्ड, राज्यों की इकाइयों में इसे लेकर कोई मतभेद नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण हिंदुओं के लिए भी जरूरी है, मुसलमानों के लिए भी जरूरी है। यह तो अभी लोगों को जागरूक बनाने का प्रयास हो रहा है कि छोटा परिवार सुखी परिवार। इसे जो लोग धर्म से जोड़ रहे हैं, वे नादानी कर रहे हैं। इस अभियान को कमजोर कर रहे हैं।

सूर्यनाथ सिंह : निंदा तो आपके नेता करते हैं, पर उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाते? क्यों? विजयवर्गीय के बेटे के लिए प्रधानमंत्री ने भी बोला, पर वह पार्टी में बने रहे? साध्वी प्रज्ञा के लिए भी उन्होंने बोला, पर कुछ नहीं हुआ?
’प्रधानमंत्री जी ने सबके लिए एक नियम लागू किया है। उन्होंने अब भी कहा है कि ऐसी बयानबाजी किसी को नहीं करनी है। जिसको जो काम मिला है, वह वही काम करे। हर आदमी को जो जिम्मेदारी मिली हुई है, वह उसी का निर्वाह करे, तो अच्छा है। कई लोगों को ऐसे बयानों पर नोटिस भी दिया गया है।

सूर्यनाथ सिंह : जनसंख्या नियंत्रण के मामले में सरकार कोई नीति क्यों नहीं बनाती?
’देखिए, हम इस पर कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं करने वाले। अभी हमने इसकी शुरुआत की है। प्रधानमंत्री इतने बड़े नेता हैं कि वे अगर कुछ कहते हैं, तो लोग उसे सुनते हैं और उसका असर होता है। उन्होंने स्वच्छता के लिए कहा, तो उसका असर हुआ। इसलिए प्रधानमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कहा है, तो उसका असर होगा। प्रधानमंत्री ने जागरूकता फैलाई है, लोग उसका पालन करेंगे।