हिन्दी साहित्य और हिंदी समाज के बीच का रिश्ता लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में इन…
हिन्दी साहित्य और हिंदी समाज के बीच का रिश्ता लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में इन…
अधिकतर नए रचनाकारों ने अपनी रचना पर भरोसा करने की जगह विज्ञापन के उन सारे औजारों का उपयोग करना शुरू…
हिंदी की विभिन्न साहित्यिक विधाओं में कविता आज सर्वाधिक संकट के दौर में है।
हिंदी में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना के साथ ही साहित्य का राजनीति और समाज से रिश्ता एक नए दौर…
हिंदी में जिस एक साहित्यकार को सबसे अधिक हमले झेलने पड़े, वे अज्ञेय थे।
आधुनिक लोकतांत्रिक राज्य और उसकी संस्थाओं से साहित्यकारों का क्या संबंध होना चाहिए, इस पर लंबे समय से बहस होती…
नए यथार्थ के अनुरूप कहानी के स्वरूप में परिवर्तन स्वाभाविक है। हर दौर में कहानी के स्वरूप में कुछ न…
‘गो-दान’ के मूल पाठ के सामने आ जाने से पाठकों और अध्येताओं के लिए भिन्न-भिन्न संस्करणों में हो रहे परिवर्तनों…
आलोचक की प्रतिबद्धता पाठक के प्रति न होकर रचनाकार के प्रति हो गई है। व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित आलोचना-कर्म ने…
प्रासंगिकता का सवाल साहित्य और समाज के संबंध का सवाल नहीं है। यह साहित्य की सामाजिक उपयोगिता का सवाल है।