शाम का समय था। सूरज अपने घर लौटने की तैयारी कर रहा था। तभी उसे रास्ते में चांद मिला। वह अपने काम पर जा रहा था। दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराए। ढलती धूप देख नीले आसमान में उड़ते हुए पक्षी अपने घरों की ओर लौटने लगे। तभी सूरज सुनहरी-लाल रंग के गोले के समान हो पृथ्वी के और नीचे जाने लगा। चांद पहले से ज्यादा चमकीला एवं सुंदर हो कर ऊंचा चढ़ता जा रहा था। बंटी ने अपने घर की छत से चांद को आसमान में चढ़ते और सूरज को धरती की और लुढ़कते देखा। उसने सोचा, जरूर चांद ने सूरज को धक्का दिया होगा। तभी तो वह स्वयं खिलखिला कर चमक रहा है। लुढ़कते सूरज को पकड़ कर उठा भी नहीं रहा है। बेचारा सूरज पूरे दिन चमक कर धरती को रोशनी दे रहा था, इसलिए थक कर चूर हो गया होगा, और जैसे ही चांद ने उसे धक्का दिया होगा, तो वह लुढ़क गया होगा। इसलिए उसने सबसे नाराज हो कर अंधेरा कर दिया है।

बंटी ने चांद को पुकारा, ‘चंदा तुम नीचे आओ और सूरज को मना कर आसमान में ले कर जाओ’। लेकिन चांद तो टिमटिमाते तारों के साथ अपनी टीम बना कर गोल-मटोल सुनहरी हो कर चमकता ही रहा। उसे बंटी की आवाज से कोई फर्क नहीं पड़ा।

बाल कथा: जासूस ओजस ने उजागर किया नशे का अड्डा, पुलिस ने किया सम्मानित

बंटी को चांद पर बहुत गुस्सा आया। वह खुद भी सूरज की तरह ही सवेरे से जगा हुआ था और और विद्यालय से लौटने के बाद पार्क में खेल कर आया था। इसलिए थक कर चूर भी हो चुका था। अभी उसे अपना गृहकार्य भी करना था। वह पैर पटकते हुए छत से नीचे लौट आया। अपना गृहकार्य निबटा कर उसने अगले दिन के लिए बस्ता जमाया, रात का खाना खाया और थोड़ी देर में सो गया।

सवेरे जब वह सो कर जगा, उसने देखा, सूरज की किरणें फैली हुई थीं और चांद फीका पड़ गया था। वह समझ गया कि सूरज रात भर आराम करके सवेरे पुन: अपने काम पर लौट आया है। अब चांद फीका पड़ गया है, शायद यह भी थक कर चूर है। रात भर सूरज की अनुपस्थिति में हल्की रोशनी जो देता रहा ताकि धरती पर रहने वाले जीव चैन की नींद सो सकें और अंधेरे से डरें भी नहीं।

बाल कथा: पुरानी हवेली, बंद संदूक और बच्चों की जिज्ञासा – जब वायलिन की धुन पर खुल गया ‘खजाने का राज’

उसने अपने दिमाग को खुजाया तब समझ पाया कि वे दोनों तो अपनी-अपनी पारी के अनुसार अपना-अपना काम कर रहे हैं। जैसे वह और उसका भाई गोलू, घर में मां के द्वारा दी गई अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उसने अपने सिर को थोड़ा और खुजाया और सोचा, ‘हम्म। दोनों हम भाइयों की तरह ही काम करते हैं। लगता है कि धरती इन दोनों की मां है तभी तो वह अपनी धुरी पर घूम कर चौबीस घंटे दोनों का ख्याल रखती है और बारी-बारी से दोनों को काम करना भी सिखाती है। सूरज तो रोशनी के साथ गर्मी देता है और चांद शीतलता, काम तो दोनों का थोड़ा एक सा और थोड़ा विपरीत है।

अब बंटी का दिमाग और भी ज्यादा सोचने लगा। ‘अरे! यह तो ठीक वैसे ही है जैसे मेरा और मेरे भाई गोलू का’। उसने मन ही मन सोचा, ‘मैं रोज सवेरे पौधों में पानी डालता हूं और गोलू शाम को। दिन भर पौधों की जड़ें पानी सोखती हैं और पौधों के विभिन्न भागों तक पहुंचती है। इसीलिए शाम तक मिट्टी पुन: सूखने लगती है। तभी तो सूरज के प्रकाश से प्रकाश संश्लेषण कर दिन में पौधों की पत्तियां भोजन बनाती हैं और हमें ऑक्सीजन देती हैं। जब शाम को गोलू पौधों में पानी डालता है तब मिट्टी पुन: गीली हो जाती है और जड़ें अपना कार्य करती रहती हैं।

दिनेश विजयवर्गीय की बालकथा: नंदनवन की तीन चिड़ियां- प्यार, आंसू और नई मां का जादू

मिट्टी में दिए गए खाद पानी से जड़ें भोजन प्राप्त करती हैं और पौधे के विभिन्न भागों तक पहुंचाती हैं। रात के समय जब सूरज छुप जाता है तब पत्तियां भी आराम कर गहरी सांस लेती हैं और कार्बन-डाई-आक्साइड छोड़ती हैं। तभी तो धरती विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे एवं फसलें उपजाती है है। फिर सूरज और चांद क्या भाई-भाई हैं?

तभी मां की आवाज आई, ‘बंटी, गोलू विद्यालय जाने की तैयारी करो।’ बंटी जल्दी से नहाने के लिए चला गया और दोनों भाई समय पर तैयार हो कर बस स्टाप पर पहुंच गए। लेकिन बंटी का ध्यान तो अभी भी सूरज और चांद में लगा हुआ था। उसने मन ही मन तय किया कि वह आज शाम को फिर से छत पर जाएगा और दोनों को एक साथ देखेगा। लेकिन दिन में जोरदार बारिश पड़ी तो सूरज काले गहरे बादलों के पीछे छिप गया। दिन में अक्सर हवा में गर्मी महसूस होती है। लेकिन सूरज के छिप जाने से हवा भी ठंडी हो गई। दिन में ही सांझ का सा ठंडा मौसम हो गया।

होलू क्या करे: जब मां को थकान से टूटते देखा, तो छोटे बच्चे ने लिया ऐसा फैसला जिसने सबका दिल जीत लिया

‘तो सूरज बाबू मौसम को भी बदल सकते हैं?’ गोलू ने सोचा। शाम हुई तब वह छत पर गया। आसमान में काले बादल छाए हुए थे। सूरज की हल्की किरणों से आसमान कहीं नीला और कहीं सुनहरी हो गया था। तभी उसने देखा आसमान में इंद्रधनुष बना हुआ था। अरे वाह! सतरंगी इंद्रधनुष? उसने अपने भाई गोलू को पुकारा, ‘गोलू देख आसमान में इंद्रधनुष बना हुआ है।’ गोलू दौड़ कर छत पर आया।

दोनों भाई सतरंगी इंद्रधनुष को देख कर कौतुहल से भर गए थे। सूरज और चांद की बारी-बारी जिम्मेदारी तो बंटी को समझ आ गयी थी लेकिन अब इंद्रधनुष में सात रंग कहां से आ गए यह सोच कर वह फिर से अपने सिर को खुजाने लग गया था। उसकी सोच खत्म होने से पहले शुरू जो हो जाती है।