
आधुनिकता की दौड़ में लोग आज बहुत आगे निकल गए हैं और पारंपरिक रीति-रिवाज व लोक संस्कृति पीछे छूट गई।…

आधुनिकता की दौड़ में लोग आज बहुत आगे निकल गए हैं और पारंपरिक रीति-रिवाज व लोक संस्कृति पीछे छूट गई।…

घर का रूठना केवल एक भौतिक स्थान का रूठना नहीं है। यह उस आधारशिला का हिलना है, जो हमें मानवता…

ताउम्र चले और कहीं नहीं पहुंचे की स्थिति तब होती है, जब चलने वाला जानता ही नहीं कि जाना कहां…

माता-पिता भी इस बदलते परिवेश में भ्रमित हैं। कुछ इस भ्रम में जी रहे हैं कि संस्कार देने का उनका…

आत्मचिंतन एक सतत प्रक्रिया है। यह एक बार किया जाने वाला कार्य नहीं, बल्कि जीवन की हर परिस्थिति में इसे…

आज जीवन मूल्य तेजी से बदल रहे हैं। सामाजिक जीवन अब कुछ ऐसी जटिलताओं से गुजर रहा है कि पिता-पुत्र…

अब तो बेटियां बेटों से बढ़ कर हैं। परवरिश और पढ़ाई से वे न केवल बेहतर इंसान साबित होती हैं,…

हम निर्जीव चीजों के धनवान हैं। मसलन पैसा, कार, मकान, पर हमारा भावनात्मक पक्ष दिवालिया हो रहा है। निर्जीव चीजों…

अगर हम मन से नहीं हारे तो दुनिया का कोई तूफान हमारे हौसले को नहीं तोड़ सकता। मन की हार…

हमारा यथार्थ हमारे स्वप्नों, हमारी आकांक्षाओं, हमारी इच्छाओं, हमारे उन विकल्पों के भीतर भी छिपा रहता है, जिन्हें हम चुन…

जीवन को उत्सव की तरह जीना है तो लोगों के प्रति मैत्री भाव रखना चाहिए। यह बात दिमाग से निकाल…

मनुष्य अगर इस गूढ़ तथ्य को समझ सके कि दुख और सुख, दोनों ही उसे उसी परम सत्य की ओर…