Vinod Kumar Shukla, Hindi Literature
जनसत्ता सरोकार: शुक्ल पक्ष- खेमेबंदी की मजबूत दीवार में एक खुली खिड़की

साहित्य का शुक्ल-पक्ष कहता है, ‘खुश रहने के लिए बहाने ढूंढ़ने चाहिए और खुश रहना चाहिए। बाद में यही बहाने…

Jnanpith Award winner | Vinod Kumar Shukla passes away
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

विनोद कुमार शुक्ल के बेटे शाश्वत शुक्ल ने अपने पिता के निधन के बारे में जानकारी दी है। शाश्वत ने…

Nandanvan story, children's children's story, mother's love, bird family
दिनेश विजयवर्गीय की बालकथा: नंदनवन की तीन चिड़ियां- प्यार, आंसू और नई मां का जादू

मां की मृत्यु के बाद बच्चों को नए परिवार में प्यार मिलता है। कठिनाइयों और जंगल की घटनाओं के बीच,…

Swara identity, women freedom, patriarchy, marital control, self-expression
स्वरा की चूड़ियों की खनक- एक स्त्री का दबा हुआ सौंदर्य, और उसका लौटता हुआ आत्मविश्वास

तनुजा चौबे की कहानी में स्वरा अपने दमनकारी माहौल, तानों और रोक-टोक के बीच धीरे-धीरे अपनी खोई पहचान वापस पाती…

Totto Chan, Tetsuko Kuroyanagi, Japanese education, Tomoe Gakuen,
अमर किरदार तोत्तो चान – एक ऐसी बच्ची जिसने दुनिया को सीखने का नया तरीका बताया

मूल रूप से जापानी भाषा में लिखी इस किताब का अंग्रेजी अनुवाद डोरोथी ब्रिटन ने ‘तोत्तो चान द लिटिल गर्ल…

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होलू क्या करे: जब मां को थकान से टूटते देखा, तो छोटे बच्चे ने लिया ऐसा फैसला जिसने सबका दिल जीत लिया

दिविक रमेश की बाल कथा ‘होलू क्या करे’ मां और बेटे के बीच स्नेह और लगाव की कहानी है।

Kedar story, sad story, emotional story, Hindi short story
जिसे बचपन ने तराशा और किस्मत ने तोड़ दिया | पारिवारिक संघर्ष, प्रेम विवाह और विस्फोट की कथा

पल्लवी सक्सेना की कहानी केदार एक अनाथ बच्चे की मेहनत, उसकी प्रेम कहानी और फिर उसके जीवन की सबसे बड़ी…

Suman Bajpai story, emotional Hindi story, father’s love, daughters bond, family story
जब एक पिता का स्नेह बना पत्नी और बेटियों की सुरक्षा का कवच, सुमन बाजपेयी की कहानी ‘ढाल’

रीमा अपने बचपन में पिता के स्नेह से वंचित रही, पर मोहित में उसे वही सुरक्षा मिली जिसकी वह तलाश…

Gulabo story, Poonam Pandey writer, Jansatta literature
जनसत्ता साहित्य: जब सूरज दादा की दुनिया में आई ‘गुलाबो’ – एक मुलाकात जिसने जिंदगी भर यादें छोड़ दीं

पूनम पांडे की कहानी ‘गुलाबो’ एक साधारण माली सूरज दादा और रहस्यमयी युवती गुलाबो के बीच पनपते अपनापन, भरोसे और…

Books vs digital, reading habits
पुस्तक संस्कृति: किताबों की खुशबू बनाम स्क्रीन की चमक – पढ़ने की बदलती दुनिया और संतुलन का पाठ

तेज़ी से डिजिटल होती दुनिया में किताबों की खुशबू अब यादों में सिमटती जा रही है। मो. अजहर आलम अंसारी…

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