Jansatta Dunia Mere Aage, jansatta Epaper
दुनिया मेरे आगे: कामयाबी की नई परिभाषा, छोटी सफलताओं और खुशियों से अवसाद पर काबू पाने का जादू

आज विश्व स्तर पर जीवन परंपरा को सुधारने की कवायद चल रही है। हमको गिलास आधा भरा दिखाई देता है…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: मदद करने पर मिलती है अलग तरह की खुशी, विज्ञान-धर्म और दर्शन से है प्रमाणित

मदद और ईर्ष्यारहित भावना से मिलने वाली खुशी ही सच्ची खुशी है। हमारे स्वास्थ्य पर इस बात का बहुत गहरा…

Jansatta Dunia Mere Aage, jansatta Epaper
दुनिया मेरे आगे: एक बार गुस्सा और क्रोध को छोड़कर देखें, खुशियों और आनंद से भर जाएगा जीवन, खुद बनाएं स्वभाव का सांचा

अगर किसी व्यक्ति का स्वभाव झगड़ालू है, तो आमतौर पर सब लोग उससे दूरी बनाकर चलते हैं। अगर वह व्यक्ति…

Peace mind| Dunia mere aage
दुनिया मेरे आगे: खुशी और आजादी, संबंधों में मधुरता कायम रखने के लिए त्याग की होती है जरूरत

जब व्यक्ति का स्वयं पर ही विश्वास नहीं रख पाता, तो वह आत्मसम्मान की कमी महसूस करने लगता है और…

Dunia Mere Aage, Happiness, Zeal
दुनिया मेरे आगे: संतोष का सुख और दुख का कारण, स्वयं में रहना ही देता है जीवन में आनंद

जीवन में जितने भी तनाव आते हैं, उसके पीछे का मुख्य कारण मन की अशांति ही है। हमारे मन के…

Dunia Mere Aage | Happiness | Pleasure |
दुनिया मेरे आगे: जीवंत रिश्ते और जिंदादिली, खुशियों के लिए जरूरी है मन में सुखद अनुभूति होना

पान के प्राचीन दर्शन शास्त्र में एक संदर्भ है- ‘वाबी-साबी’। इसके तहत हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के ऐसे अधूरेपन में…

Vichar Bodh | Jansatta Vichar Bodh | Ravivari
दुनिया मेरे आगे: आज की दुनिया में धन की महत्ता और असंतोष का आकाश, आनंद के लिए आध्यात्म जरूरी

भारतीय दर्शन मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हुए मनुष्य मात्र को परमार्थ के प्रति अभिप्रेरित करता रहा है।…

Dunia Mere Aage, Happiness, Zeal
दुनिया मेरे आगे: जीवन में आनंद की कीमत, खुशियों की चाबी और छोटे-छोटे अवसरों का आना

खुशी अगर पानी है तो हमें अपनी सोच ऐसी बनानी होगी कि हम किसी भी हाल में रहें, प्रसन्न ही…

kite fly | Delhi
दुनिया मेरे आगे: जीवन में दूसरों के लिए जगह, निजी परिवार के दायरे से बाहर निकलने का सुख

आज का मनुष्य ‘सैद्धांतिक आसमान’ यानी ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ से गिरकर ‘खजूर पर’ यानी ‘मानव केंद्रित’ भी नहीं रह सका, बल्कि…

Happy and sad| Life| society
दुनिया मेरे आगे: स्वीकार का साहस, धोखाधड़ी की भीड़ में विश्वसनीयता की जरूरत

कभी भी किसी ईमानदार आदमी को अपने स्वभाव और काम का प्रचार नहीं करना पड़ता। उसकी प्रशंसा अपने आप फैलती…

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