जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: ज्ञान के पायदान, आत्म ज्ञानी व्यक्ति को रसमय नहीं लगता यह संसार

आत्मज्ञान के लिए सर्वप्रथम जो कड़ी है, वह है मन। मन को हम स्वयं नियंत्रित नहीं कर सकते। मन का…

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दुनिया मेरे आगे: जुलाई से सीबीएससी के स्कूलों में शुरू होगी मातृभाषा में पढ़ाई, मानसिक और शैक्षणिक स्तर पर समृद्ध होंगे बच्चे

अभिभावकों को समझना होगा कि आरंभिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होने से बच्चे सहजता से सीख पाएंगे। पढ़ते, लिखते और…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: हर रिश्ते में स्वाभाविक हैं मतभेद, सहनशीलता और धैर्य के साथ सुलझाने में ही होती है समझदारी

जब युवा मन की जिज्ञासाओं को बुजुर्ग खुले दिल से सुनें, और युवा भी बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने को…

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दुनिया मेरे आगे: बदलता जा रहा है गांव, लुप्त होती जा रही है लोक संस्कृति

आधुनिकता की दौड़ में लोग आज बहुत आगे निकल गए हैं और पारंपरिक रीति-रिवाज व लोक संस्कृति पीछे छूट गई।…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: रूठे घर की दास्तां, मानवता से जोड़ने की आधारशिला का हिलना

घर का रूठना केवल एक भौतिक स्थान का रूठना नहीं है। यह उस आधारशिला का हिलना है, जो हमें मानवता…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: लड़का पैदा होने का आकर्षण अभी भी नहीं हुआ है कम, मां-बाप का बेहतर खयाल रखती हैं बेटियां

अब तो बेटियां बेटों से बढ़ कर हैं। परवरिश और पढ़ाई से वे न केवल बेहतर इंसान साबित होती हैं,…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: किसी का कंधा किसी के सिर का बन सकता है सहारा, बुजुर्गों को कहा जाता था अनुभवों का भंडार

हम निर्जीव चीजों के धनवान हैं। मसलन पैसा, कार, मकान, पर हमारा भावनात्मक पक्ष दिवालिया हो रहा है। निर्जीव चीजों…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: हर तरह से युग्म के सिद्धांत पर चलता है मानव समाज, दूसरों के लिए जगह छोड़े बिना स्वयं की स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं

हमारा यथार्थ हमारे स्वप्नों, हमारी आकांक्षाओं, हमारी इच्छाओं, हमारे उन विकल्पों के भीतर भी छिपा रहता है, जिन्हें हम चुन…

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दुनिया मेरे आगे: जीवन की गहराइयों में छिपी होती है उत्साह और खुशी, उत्सव की तरह जीनी चाहिए जिंदगी

जीवन को उत्सव की तरह जीना है तो लोगों के प्रति मैत्री भाव रखना चाहिए। यह बात दिमाग से निकाल…

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दुनिया मेरे आगे: परिवर्तन कोई कमजोरी नहीं बल्कि हमारी मानसिक परिपक्वता का है प्रमाण, जीवन को खुले मन और शांत चित्त से स्वीकार करना ही है सच्ची समझदारी

हर व्यक्ति का जीवन एक अलग राह पर है। इसलिए दूसरों की तुलना में खुद को कमतर आंकना, या किसी…

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दुनिया मेरे आगे: भागदौड़ भरी जिंदगी ने कम की चेहरे की खुशी, नकारात्मक बातों को करें नजरअंदाज

जीवन की जटिलता के वर्तमान दौर में खुश रहना आसान भले नहीं लगता, लेकिन यह असंभव नहीं है। हमारी दिनचर्या…

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