लोग केवल एक बात कहते हैं कि समय ही नहीं है। घर से नौकरी, नौकरी से घर। बचा हुआ समय…
जिस तरह हम स्कूल में कई सारी नई बातें सीखते हैं, वैसे हमें यह भी सीखना होगा कि किस तरह…
जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें विप्रम के विचार।
जनसत्ता अखबार के स्तम्भ ‘दुनिया मेरे आगे’ में आज पढ़ें पंकज त्रिवेदी के विचार।
आलस्य का सबसे सूक्ष्म प्रभाव हमें हमारे लक्ष्यों से भटका देता है। जो समय सपनों को साकार करने में लगना…
यह परिवर्तन एक दिन, एक दशक का नहीं है, न ही किसी आंदोलन के नारों से जन्मा है और न…
आभार हमें आत्म-विकास के लिए प्रेरित करता है। जब हम अपने जीवन में मौजूद अच्छाइयों की कद्र करते हैं, तो…
जानकारी ही बचाव है। इस मसले पर बेहद संवेदनशील होकर जागरूकता अभियान चलाने की नितांत आवश्यकता है। हमें सामाजिक सरोकारों…
संवाद केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं होता। एक मुस्कान, एक स्पर्श, एक सहमति में हिलाया गया सिर भी बहुत…
वृद्धों के अनुभवों का विशाल भंडार, जिसे कभी समाज की धरोहर माना जाता था, आज उनके ज्ञान को ‘पुरानी बातें’…
हमारे देश में बढ़ती जनसंख्या एक समस्या हो सकती है, मगर एक हकीकत यह भी है कि इस कारण से…
सच्चे मन से की गई समाज सेवा हृदय को परमानंद से भर देती है। इसका सुख वही ले पाते हैं,…